अभी अभी

इंसान


सब कुछ समझते हुए भी नासमझ रह कर
शातिर और स्वार्थी दुनिया के बीच इंसान बनना अच्छा है

झूठ, लालच और फरेब से बचकर 
ज़ालिम दुनिया में बेवकूफ बनकर रहना अच्छा है

किस्मत की लकीरों पर मत कर भरोसा
मेहनतकश हथेलियों पर नयी लकीरें बनाना अच्छा है

गैरत मार कर क्यों मिलाएं किसी की हां में हां
अपनी काबिलियत से कच्ची सीढ़ियां बनाना अच्छा है

© Alok Ranjan