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Tuesday, October 11, 2016

कातिल मच्छरों से चीन की जंग




7.25 लाख लोग दुनिया में हर साल मच्छर से मरते हैं

561 लोग भारत में 2014 में डेंगू से मरे


220 लोग भारत में 2014 में मलेरिया से मरे



एक मच्छर हम सबकी ज़िंदगी पर कितना भारी पड़ सकता है.. इसका अंदाज़ा आपको इन आंकड़ों को देखकर हो जाएगा... लेकिन आपको हैरानी होगी कि हमारे पड़ोसी देश चीन ने मच्छरों का एक तरह से सफाया कर दिया है.. चीन ने नामुमकिन से दिखने वाले काम को कैसे किया आपको बताते हैं...

चीन ने मच्छरों को मच्छरों से मारा

चीन में मौजूद ये है दुनिया की सबसे बड़ी फैक्ट्री... जहां मच्छर पैदा किए जाते हैं.. हर हफ्ते 2 करोड़ मच्छरों को देश के अलग-अलग हिस्सों में छोड़ा जाता है... ये सभी नर मच्छर होते हैं... लैब में इन मच्छरों के जीन में बदलाव कर दिया जाता है... फिर इन्हें उन जगहों पर छोड़ दिया जाता है जहां मच्छर पाए जाते हैं... इन जेनेटिकली मॉडिफाइड नर मच्छर जब मादा से मिलते हैं.. तो इनसे पैदा होने वाले लार्वे अपने आप मर जाते हैं... यानि ना लार्वा होगा.. और ना ही मच्छर पैदा होंगे...


अपने पहले ही ट्रायल में इसने ज़बरदस्त कामयाबी पायी थी... जिस इलाके में इन मच्छरों को छोड़ा गया.. कुछ दिनों बाद वहां 90 फिसदी मच्छर कम हो गए... जिसके बाद चीन ने इसका इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करना शुरु कर दिया...भारत में भी ऐसे मच्छरों पर काम शुरु हो चुका है.. मुंबई की एक कंपनी GBIT को ऐसे मच्छरों के ट्रायल की मंजूरी मिल चुकी है.. WHO की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल इलाज के लिए मलेरिया पर 11 हज़ार 640 करोड़ और डेंगू पर करीब 6 हज़ार करोड़ खर्च किए जाते हैं..

घास ने रोकी मच्छरों की जनसंख्या

मच्छरों की संख्या वहां बढ़ती है जहां पानी जमा होता है... गांवों में मच्छरों के पनपने के लिए खेतों से बेहतर कोई और जगह नहीं है... खासकर चावल के खेतों में... इसलिए चीन में मदद ली गयी इस खास घास की... इसका नाम है Azolla microphylla.. इन्हें चावल के खेतों में उगाया दिया जाता है... कुछ ही दिनों में ये पूरे खेत में फैल जाते हैं... जिससे मच्छरों के लार्वे पनप ही नहीं पाते... भारत में भी इनका इस्तेमाल शुरु किया गया है.. तमिलनाडु में किसान चावल के खेतों में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं... क्योंकि मच्छरों के प्रजनन को रोकने के अलावा चावल के पौधों को भी इससे फायदा मिलता है...

मच्छरों की वजह से लोगों पर दोहरी मार पड़ती है... एक तो इससे होने वाली बीमारी के इलाज का खर्चा.. दूसरा इससे बचाव का खर्चा... मच्छरों से होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए सरकार ने पिछले साल 43484 करोड़ रुपए के बजट को मंज़ूरी दी... जबकि पिछले साल देशभर के लोगों ने 4400 करोड़ रुपए मच्छरों को भगाने वाले उत्पादों को खरीदने पर खर्च किए