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Friday, August 06, 2010

यही दुनिया है....


यही दुनिया है
यही दुनिया की रीत है
हंस कर बोलते हैं सभी सामने
पीठ पीछे लगते हैं गला दबाने
राम जाने ये कैसी प्रीत है...
यही दुनिया है..
यही दुनिया की रीत है...

दोस्तों में कैसे ढूंढे दुश्मन...
समझ नहीं आता है...
दुश्मन भी कभी-कभी दुआ दे देते हैं
पर ना जाने क्यों यकीन नहीं आता है
यही दुनिया है...
यही दुनिया की रीत है...

अब तो उपरवाले तेरा ही सहारा है
अब तो सब जग हारा है
चाहता हूं खुद से खड़ा हो जाउं
अपनी राह खुद बनाउं
मंजिल भी अपनी हो
साथ चलने वाले भी अपने हो
तभी अपनी जीत है
यही दुनिया है...
यही दुनिया की रीत है...

©Alok Ranjan