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Friday, July 03, 2015

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 2

कहानी का पहला पार्ट यहां पढ़ें
कहानी के पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि किस तरह अभी-अभी कॉलेज से निकली आयशा शर्मा को इंटर्नशिप चाहिए थी... कई जगहों पर उसने कोशिश की लेकिन उसकी इंटर्नशिप हुई नहीं.. आखिरकार उसने अपने चचेरे भाई से कुछ करने को कहा तो उसने इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स में अपने बेहद करीबी दोस्त रोहित राज से मिलने भेजा.. आयशा को वहां इंटर्नशिप मिल गयी... लेकिन जैसे-जैसे उस ऑफिस में वक्त बीतता गया.. वो अपने भाई के दोस्त रोहित जो कि वहां पर एक तरह से उसका सीनियर भी था.. उससे वो बेहद प्रभावित हो गयी... अब आगे... 

आयशा ब्रेकफास्ट तो कर ले... आयशा की मम्मी ने आवाज़ लगायी...

आ रही हूं मम्मी... दो मिनट में.. मीनाक्षी से  बात कर रही हूं... 

भगवान जाने क्या होगा इस लड़की का... आयशा... मीनाक्षी से बात कर रही है या फिर साक्षम से... ब्रेकफास्ट कर ले... साक्षम कहीं भागा नहीं जा रहा... बाद में भी बात कर सकती है ना.. वैसे भी मैं देख रही हूं... तेरी बातें उससे खूब हो रही हैं..

अरे मम्मी क्या है यार... नहीं कर रही साक्षम से बात... आयशा ने चिल्लाकर जवाब दिया.. और फिर फोन में फुसफुसा कर बोली... 

साक्षम यार..चल बाद में बात करती हूं.. मम्मी ना चिल्ला रही हैं... 

आयशा ने फोन काटा ही था कि दोबारा घंटी बजने लगी.. 

अरे यार अब कौन है... लैंड के नंबर से कौन फोन कर रहा है मुझे.. 

हैलो... 

हैलो.. क्या आप आयशा शर्मा बोल रही हैं... 

हां जी बोल रही हूं.. आप कौन..

जी मैं इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स के एचआर से बोल रही हूं.. आपने इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया था... आप कल सुबह 10 बजे... अपने डॉक्यूमेंट्स के साथ आ जाएं... आपकी इंटर्नशिप यहां मंज़ूर कर ली गयी है... 

थैंक्यू सो मच... ओके.. मैं कल सुबह 10 बजे आ जाऊंगी.. थैक्यू..थैंक्यू सो मच... 

मम्ममममी... मेरा काम हो गया... आयशा चिल्लाती हुई नीचे भागी...

अरे आराम से.. आराम से.. क्या हो गया.. क्यों पागल हुई पड़ी है.. साक्षम ने प्रोपोज तो नहीं कर दिया... 

अरे मम्मी... आप भी ना... ऐसी कोई बात नहीं है... मुझे इंटर्नशिप मिल गयी.. इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स में... अक्षित भैया का तो जवाब नहीं... एक बार उन्होंने अपने दोस्त से कहा और काम हो गया... कल सुबह 10 बजे जाना है मुझे.. अपने डॉक्यूमेंट्स के साथ... 

अरे वाह.. ये तो बहुत अच्छी खबर है... अक्षित को बता दे... 

हां अभी फोन करती हूं... 

पहले ब्रेकफास्ट तो कर ले... 

नहीं मम्मी पहले बता तो दूं... भइया को... थैंक्यू तो बोल दूं.. 

हैलो.. अक्षित भैया.. थैंक्यू सो मच... मुझे इंटर्नशिप मिल गयी...

अरे वाह... देख बोला था मैंने.. तेरा काम हो जाएगा... अरे रोहित मेरा बहुत अच्छा दोस्त है... चिंता मत कर.. जा वहां पर इंटर्नशिप कर... रोहित को बोल दूंगा.. तुझे कोई परेशानी नहीं होगी वहां पर... और हां रोहित से ज़रा ठीक से पेश आइयो...ये कॉलेज वाला तरीका अब वहां नहीं चलेगा... प्रोफेशनल जगह है... 

ठीक है भैया... आपके दोस्त को वहीं जाकर थैंक्यू बोलूंगी... वैसे दोस्ती सही है आपकी... आपके एक फोन पर काम हो गया.. और कहां मैं मारी-मारी फिर रही थी... 

हा हा हा हा... अच्छा चल ठीक है.. मुझे ऑफिस निकलना है... बाद में बात करता हूं.. 

ओके भैया बाय-बाय एंड अगेन थैंक्यू सो मच...बाय...

अगले दिन आयशा इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स के दफ्तर सुबह 9:50 पर ही पहुंच गयी..एच आर में थोड़े बहुत कागज़ाती कार्रवाई के बाद उसे ऑफिस में भेज दिया गया... उससे कहा गया कि आप सॉफ्टवेयर टेस्टिंग डिपार्टमेंट में रूचि से मिल लें... और उनके साथ मिलकर ही काम देखें और सीखें... 

हैलो मैम.. आप का ही नाम रूचि है.. 

हैलो.. हां मैं ही रूचि हूं... 

अच्छा-अच्छा.. आ जाओ.. रोहित ने बताया था तुम्हारे बारे में... चलो आज तो तुम्हारा पहला दिन है.. ऑफिस में घूमो फिरो... और जो कुछ भी जानना हो.. समझना हो तो मुझसे पूछो... धीरे-धीरे तुम्हें काम समझा दूंगी कि इंटर्नशिप के दौरान तुम्हें करना क्या होगा... 

ओक मैम... ठीक है... मैम एक बात पूछूं.. 

हां-हां पूछो... 

ये रोहित राज सर भी टेस्टिंग में ही हैं क्या... 

नहीं-नहीं रोहित तो सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलेपर है... उसकी टीम को ही हमें सपोर्ट करना होता है... 

ओके.. मैम.. थैंक्यू... एक्चुएली मुझे उनसे मिलना था और थैंक्यू बोलना था... 

अच्छा.. ठीक है.. यहां से सीधे चली जाओ... फर्स्ट राइट... वहीं तुम्हें कहीं वो सिस्टम में सिर घुसाए... चश्मा चढ़ाए... रोहित मिल जाएगा... 

ठीक है मैम.. मैं ज़रा उनसे मिल कर आती हूं... 

आयशा जैसे ही वहां पहुंची तो देखती है कि... सच में चश्मा पहने.. रोहित सर बिल्कुल कंप्यूटर में घुसे जा रहे थे... थोड़ी देर वो पीछे खड़ी रही... सोचती रही कि क्या करूं... पता नहीं रोहित सर अगर कोई ज़रूरी काम कर रहे हों.. और मेरी आवाज़ सुनकर नाराज़ हो गए तो क्या होगा.. वैसे चेहरे से भी गुस्सैल नज़र आते हैं... और थोड़े खड़ूस भी... लेकिन कपड़े  पहनने के ढंग से तो इतने सीनियर लग नहीं रहे हैं... मस्त जींस और टीशर्ट डाल रखी है... और उम्र भी उतनी नहीं लग रही जितनी मैं सोच रही थी.. 

हैलो सर... 

ओ हो... आयशा शर्मा.. आ गयीं आप...वेलकम-वेलकम... कोई दिक्कत तो नहीं हुई... 

नो सर... टेस्टिंग डिपार्टमेंट में भेजा गया है मुझे रूचि मैम के पास... 

अच्छा.. तब तो मज़े हैं तुम्हारे... डिपार्टमेंट ही वो आराम का है.. हा हा हा हा काम ही नहीं होता कुछ... 

हैं सर..ऐसा है.. फिर क्यों डाला मुझे उसमें... 

अरे नहीं-नहीं मज़ाक कर रहा हूं... अगर काम नहीं होता तो डिपार्टमेंट बनाते ही क्यों.. चलो मैंने रूचि को बोल दिया है... तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी.. 

ठीक है सर.. थैंक्यू सो मच सर.. कि आपने मेरी हेल्प की.. 

अरे तुम मेरे बेहद करीबी दोस्त की बहन हो... हेल्प तो करनी ही थी.. आखिर हमें भी यहीं रहना है... दोस्त की मदद नहीं करूंगा तो किसकी करूंगा... 

ओके सर.. अगेन थैंक्यू सो मच... 

ओके.. 

आयशा वापस अपने डिपार्टमेंट की ओर मुड़ गयी...और सोचने लगी.. रोहित सर उतने खड़ूस हैं नहीं जितने दिखते हैं... कम से कम पहली इस बार वाली मुलाकात तो ठीक ही रही...

मिल आयी तुम रोहित से... 

हां मैम... 

क्या कहा उसने... कहीं ऐसा तो नहीं कहा कि इस डिपार्टमेंट में कोई काम धाम तो है नहीं.. 

हां मैम.. बिल्कुल यही कहा... आपको कैसे पता... सर ने इतनी जल्दी फोन करके बता भी दिया क्या..

हा हा हा हा.. अरे नहीं-नहीं.. वो मेरे डिपार्टमेंट के बारे में ऐसा ही कहता रहता है... सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है उसका...सिर्फ दिखने से ही खड़ूस दिखता है.. दिल से बेहद अच्छा है... बेहद हेल्पिंग नेचर वाला बंदा है...वैसे है तो बिहारी... लेकिन बिहारियों वाले एक भी गुण नहीं हैं उसमें... 

क्या वो रोहित सर बिहारी हैं...

हां.. क्यों तुम्हें पता नहीं चला...

नहीं मैम...उनके बोलने से तो बिल्कुल भी नहीं लगता कि वो बिहार से हैं... और मुझे तो बिहारियों से दूर रहना ही पसंद हैं...

हा हा हा हा.. सबको ऐसा ही लगता है...लेकिन रोहित वैसा  है नहीं... बिहारियों के बारे में तुम्हारे ख्यालात बदलने वाले हैं मैडम.. हां एक बात और बता दूं... अभी तो हंस के बात कर रहा था.. लेकिन उसके गुस्से से बचकर रहना... एक बार जब उसे गुस्सा आ गया तो समझ लो... हमारे सुपर बॉस भी उससे बच कर निकल जाते हैं... 

हा हा हा हा ओके ठीक है मैम... 

अब आयशा के दिमाग में बहुत कुछ चलने लगा...यार ये तो सही है... बिहारियों से मुझे चिढ़ होती थी.. बिहारियों के लिए गाली देती थी.. और काम भी आया तो कौन.. एक बिहारी... सही है बेटा... रोहित राज... अरे यार नाम भी तो बिहारियों वाला है.. मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था.... कितनी डंब हूं मैं... वैसे एक बात तो है... अबतक तो बिहारियों वाले एक भी गुण रोहित सर में दिखे नहीं हैं... लेकिन क्या वाकई वो इतने गुस्सैल हैं.. कि बॉस को भी बच कर निकलना पड़े... चलो देखते हैं... इन रोहित राज सर को... हैं क्या चीज़ ये...