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Saturday, July 16, 2016

ज़िंदगी




अरे तू तो वही है
जो अक्सर गरीबों की नींदों में दिखती है
जो इच्छाओं के हर नुक्कड़ पर खड़ी मिलती है
जो बच्चों की ज़िदों की छतों पर घूमती है
अरे कहीं तू ख्वाब तो नहीं

अरे तू तो वही है
जो हरदम भागती-दौ़ड़ती रहती है
जो सबको अपने पीछे रखती है
जो गरीबों के लिए ख्वाब है
जो अमीरों के लिए हैसियत है
अरे कहीं तू हसरत तो नहीं

अरे तू तो वही है
जिसने हर पल तड़पाना सीखा है
जिसने हर मोड़ पर गिराना सीखा है
जो ख्वाबों का गला घोंट देती है
जो हसरतों को सूली पर चढ़ा देती है
अरे कहीं तू ज़िंदगी तो नहीं

ज़िंदगी...चल तू बेवफा ही सही
भले ही घोंट दे तू हसरतों का गला
डूबो दे तू ख्वाबों को समंदर में
पर इतना तो समझ ही ले
तूझे हम जी के दिखाएंगे
तूफानों में लौ को जला कर दिखाएंगे
मौत से दोस्ती करने से पहले ऐ ज़िंदगी
तेरे हर पल को अपना बना कर दिखाएंगे


©Alok Ranjan

Sunday, July 03, 2016

MTCR में शामिल होने से भारत को क्या मिलेगा ?

भारत MTCR यानी मिसाइल टेक्नॉल्जी कंट्रोल रिजीम का सदस्य बन गया... अब अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक पाने में उसे कोई मुश्किल नहीं होगी.. अब इससे चीन परेशान है.. क्योंकि वो इस ग्रुप का हिस्सा नहीं है.. भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर की मौजूदगी में भारत को औपचारिक तौर पर MTCR यानि मिसाइल टेक्नॉल्जी कंट्रोल रिजीम का 35 वां सदस्य देश बनाया गया... यानि हथियारों के बहुपक्षीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में भारत पहली बार एंट्री करेगा... MTCR में शामिल होने के चार बड़े फायदे हैं...

पहला फायदा 
अब भारत सदस्य देशों से अत्याधुनिक मिसाइल तकनीक आसानी से हासिल कर सकेगा..

दूसरा फायदा 
भारत अपनी मिसाइलें दूसरे देशों को बेच भी सकता है, यानि पहली बार हथियारों का निर्यातक देश बन सकेगा..

तीसरा फायदा
आतंरिक सुरक्षा के लिए अमेरिका से प्रीडेटर ड्रोन खरीद सकता है, जिनका इस्तेमाल आतंकवादियों पर हमले और नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में किया जा सकेगा..

चौथा फायदा
न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप यानि एनएसजी की सदस्यता की दावेदारी मज़बूत होगी, 48 देशों के इस ग्रुप में प्रवेश का रास्ता एक बार फिर खुल सकेगा

MTCR का सदस्य बनने पर भारत को कुछ नियमों का पालन करना पड़ेगा जैसे अधिकतम 300 किलोमीटर से कम रेंज वाली मिसाइल बनाना, ताकि हथियारों की होड़ को रोका जा सके... 1987 में अमेरिका,  फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, जापान, इटली और ब्रिटेन ने मिलकर MTCR का गठन किया.. भारत को मिलाकर अब इसमें 35 देश हो गए हैं... इसका मकसद केमिकल, बायलोजिकल और न्यूक्लियर मिसाइलों के इस्तेमाल को सीमित करना है...

MTCR में शामिल होने के बाद भारत सरकार के सूत्र इस बात का दावा कर रहे हैं कि एनएसजी में शामिल होने के लिए भारत का दरवाज़ा एक बार फिर से खुल सकता है.. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि विरोध कर रहे देशों के साथ चीन को आखिर भारत कैसे राज़ी करेगा.. वो चीन जो लगातार भारत का ये कहकर विरोध कर रहा है कि भारत पहले एनपीटी पर हस्ताक्षर करे और उसके बाद ही उसे एनएसजी में सदस्यता दी जाए

Tuesday, June 28, 2016

अगर भारत NSG में शामिल हुआ

NSG में शामिल होने के चार फायदे 



न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल होने का रास्ता भारत के लिए उस वक्त खुला जब 2008 में अमेरिका से न्यूक्लियर डील हुई... सवाल ये है कि भारत के लिए NSG में शामिल होना इतना ज़रूरी क्यों है... दरअसल एनएसजी में शामिल होने से देश को चार बड़े फायदे होंगे

पहला फायदा
परमाणु तकनीक आसानी से मिलेगी
 भारत एनएसजी में शामिल हुआ तो उसे दवाई से लेकर न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने तक की तकनीक बेहद आसानी से उपलब्ध होगी... भारत के पास अपनी स्वदेशी तकनीक भी है.. लेकिन एनएसजी के सदस्य के तौर पर दूसरे देशों के पास मौजूद अत्याधुनिक तकनीक हासिल करने में किसी तरह की कोई मुश्किल नहीं आएगी. भारत का लक्ष्य है कि वो उर्जा की अपनी 40 फीसदी जरूरत रीन्यूवेबल और क्लीन एनर्जी से पूरा करेगा... और ये तभी मुमकिन हो पाएगा जब परमाणु उर्जा के उत्पादन को बढ़ाया जाए...

दूसरा फायदा
यूरेनियम आसानी से मिलेगा
एनएसजी का सदस्य बनते ही परमाणु उर्जा उत्पादन भारत के लिए आसान हो जाएगा.. क्योंकि रिएक्टर्स में इस्तेमाल होने वाला यूरेनियम उसे सदस्य देशों से आसानी से मिल जाएगा

तीसरा फायदा
मेक इन इंडिया को बढ़ावा
 यही नहीं भारत इसके ज़रिए मेक इन इंडिया प्रोग्राम को बढ़ावा दे सकता है... सदस्यता मिलने के बाद भारत न्यूक्लियर पावर प्लांट के उपकरणों का उत्पादन बड़े पैमाने पर अपने यहां कर सकेगा... जिसका इस्तेमाल आर्थिक और रणनीतिक फायदे के लिए किया जा सकता है.

चौथा फायदा
मेड इन इंडिया पावर प्लांट
 भारत के पास वो काबिलियत आ जाएगी कि वो दुनिया के दूसरे देशों को अपने पावर प्लांट बेच सके... इसका मतलब ये हुआ कि पूरी न्यूक्लियर इंडस्ट्री और इससे संबंधित तकनीक के विकास के बाज़ार में भारत की अपनी मज़बूत जगह बन जाएगी...
  
चौथा फायदा
उर्जा जरूरतें पूरी होंगी 
एक ओर चीन जहां भारत को एऩएसजी में शामिल होने से रोकना चाहता है.. वहीं दूसरी ओर वो 2020 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को तीन गुना करना चाहता है.. चीन की तरह ही भारत को भी उर्जा की बड़ी जरूरत है...


भारत के पास फिलहाल 21 परमाणु संयत्र हैं... जिनसे 5800 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है... 6 नए रिएक्टर्स अभी बनाए जा रहे हैं... अपनी ऊर्जा संबंधी जरूरतों को देखते हुए भारत ने 2032 तक 63 हज़ार मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य बनाया हैवैसे एनएसजी में शामिल होने का एक रास्ता ये है कि भारत एनपीटी पर साइन कर दे और एनएसजी में शामिल हो जाए... पर इसका मतलब ये हुआ कि हमें अपने सारे परमाणु हथियारों को नष्ट करना होगा.. जो कि पाकिस्तान जैसे अस्थिर पड़ोसी के मौजूद रहते करना ठीक नहीं होगा..

Thursday, May 19, 2016

तमिलनाडु में अम्मा रिटर्न्स


तमिलनाडु में अम्मा ने सत्ता पर दोबारा कब्ज़ा कर रिकॉर्ड बना दिया है... पिछले 27 साल में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई पार्टी सत्ता में लौटी है... जयललिता ने डीएमके और कांग्रेस के गंठबंधन को ध्वस्त कर रिकॉर्ड बना दिया है... तमाम अटकलों को दरकिनार करते हुए जयललिता ने आखिरकार वो कर दिखाया जिसके होने की उम्मीद कम लग रही थी... लगातार दूसरी बार जयललिता ने चुनाव जीतकर इतिहास को बदल दिया है...अब सवाल ये है कि आखिर अम्मा ने ये करिश्मा किया कैसे... कैसे उन्होंने तमिलनाडु के इतिहास में वो कर दिखाया जो पिछले 27 साल में नहीं हुआ था... दरअसल इसकी कई वजहें हैं...

अम्मा की जीत की पहली बड़ी वजह
रोज़गार, शिक्षा और महिला सुरक्षा पर ज़ोर 

जयललिता ने कहा था कि अगर वो सत्ता में आयी तो डीएमके की तरह मिक्सर या ग्राइंडर नहीं बल्कि लैपटॉप बांटेंगी.. शहरों को आईटी सिटी बनाएंगी.. महिलाओं की सुरक्षा पर खास ध्यान देंगी.. जिस पर मतदाताओँ ने पूरा भरोसा किया..

अम्मा की जीत की दूसरी बड़ी वजह
भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाना

भ्रष्टाचार के छींटें तो जयललिता के दामन पर भी लगें हैं.. लेकिन 2जी केस से लेकर चुनाव में पैसों के इस्तेमाल के मुद्दे को उन्होंने जमकर भुनाया... लोगों ने वादाय किया कि अगर वो सत्ता में दोबारा लौंटी तो करप्शऩ को पूरी तरह से खत्म कर देंगी.. और इसका भी बड़ा असर वोटर्स पर हुआ.. 

अम्मा की जीत की तीसरी बड़ी वजह
डीएमके की पारिवारिक कलह 

जयललिता की जीत की एक बड़ी वजह डीएमके की पारिवारिक कलह भी रही.... सुप्रीमों करुणानिधि का स्वास्थ्य ठीक नहीं था... स्टालिन को उन्होने अपना राजनीतिक वारिस घोषित कर दिया... बड़े बेटे अलागिरी ... की स्टालिन से नहीं पट रही... कनिमोझी.. दयानिधि मारन... और कलानिधि मारन ने अलग मोर्चा खोला हुआ था... मतदाताओं को लगा कि अगर डीएमके सत्ता में आयी तो सत्ता में पावर की लिए परिवार में ही जंग छिड़ जाएगी.. ऐसे में राज्य हाशिए पर चला जाएगा.. और यही बात मतदाताओं को नागवार गुज़री...

अम्मा की जीत की चौथी बड़ी वजह
अम्मा ने जनता से नज़दीकीयां बढ़ाईं
चुनाव प्रचार के दौरान लोगों से दूर रहने वाली जया लोगों के पास गयीं... बात की.. दुख दर्द जाना... इससे लोगों को एक मैसेज देने में वो कामयाब हुईं... कि वो अब लोगों के करीब आना चाहती हैं... लोगो को एक बदली हुई अम्मा नज़र आयीं और यही बात जनता को बेहद पसंद आयी़


1996 में जयललिता की पार्टी चुनावों में हार गयी... खुद भी चुनाव हारीं... करप्शन और सरकार विरोधी जनभावना ने उनकी लुटिया डूबो दी... हालांकि पांच साल बाद ही 2001 में एक बार वो फिर से सीएम की कुर्सी पर काबिज़ हुईं...  यही नहीं करप्शन के मामलों और कोर्ट से सजा मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी पार्टी को चुनावों में जीत दिलवायी...

जयललिता ने गैर निर्वाचित मुख्यमंत्री के तौर पर कुर्सी तो संभाल ली लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया... जिसके बाद उन्हें अपनी कुर्सी पनीरसेल्वम को देनी पड़ी.. हालांकि पनीरसेल्वम सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री थे क्योंकि कुर्सी पर तो जयललिता का खड़ाउं (कृपया इसे सैंडिल समझा जाए) ही विराजमान था... हालांकि जब उन्हें मद्रास हाईकोर्ट से थोड़ी राहत मिली तो मार्च 2002 में अपने खड़ाउं (यहां पर भावना पनीरसेल्वम से है) को हटाकर कुर्सी पर काबिज़ हो गयीं...

यानि कुल मिलाकर तो यही कहा जा सकता है कि विपरीत हालातों में भी अम्मा अपने रथ से डिगीं नहीं... ऐसे में उन्हें आयरन लेडी भी कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी...