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Wednesday, August 10, 2016

संजना पार्ट - 1


अरे मां तुम तो बेकार में ही परेशान हो रही हो..

नहीं नहीं.. यहां पर अब सब ठीक है... 

मां... लड़कियों के लिए दिल्ली अब सेफ है.. शेफाली ने सबकुछ बताया है मुझे... उसे भी साल होने को आ गया दिल्ली में... कोई खतरा नहीं है यहां पर... 

क्या मां...एक बार दिल्ली में इतना बड़ा हादसा हो गया तो हर बार होगा क्या... और तुम टेंशन मत लो मैं और शेफाली रह लेंगे यहां पर... हज़ारों लड़कियां रहती हैं दिल्ली में मां.. 

चलो अब बाद में बात करती हूं.. ज़रा सामान तो सेट कर लूं... 

संजना... 21 साल उम्र... खुशमिजाज़... होशियार... आज के ज़माने की लड़की... रुढ़ीवादी बंधनों में उसने शुरु से ही बंधना नहीं सीखा... इसीलिए तो एमबीए करने दिल्ली गयी... आखों में हज़ारों सपने हैं...एमबीए के बाद अच्छी सी नौकरी... नौकरी में अपनी मेहनत से तरक्की... उसके बाद शादी... फिर घर परिवार.. सबकुछ सोच रखा है उसने... और अपने इसी सपने को पूरा करने के लिए वो दिल्ली आ गयी... 

दिल्ली... कहते हैं कि दिल्ली दिलवालों की है... लेकिन 16 दिसंबर 2012 को जो कुछ भी दिल्ली में हुआ... उसने पूरी दुनिया को दहला दिया... इसलिए संजना की मां ज्यादा फिक्रमंद हो रहीं थी.. अकेली बच्ची... जिसने अभी-अभी जवानी में कदम रखा है... इतना बड़ा शहर... कुछ गड़बड़ हो गयी तो... लेकिन संजना की ज़िद के आगे तो सब बेकार है... 

संजना अपनी दोस्त शेफाली के साथ साउथ एक्सटेंशन के एक पीजी में शिफ्ट हो गयी है... पीजी के अपने नियम कायदे हैं जिनका पालन करना ज़रूरी है... और पीजी की केयरटेकर मैडम तो बेहद कड़क स्वभाव की हैं... संजना को पहली बार घर से आज़ाद होना बहुत अच्छा लग रहा था... घर में कई बंदिशें.. ये मत पहनो... यहां मत जाओ... वहां मत जाओ... उपर से पापा और भैया का पूरे शहर भर में पहचान होना.. छोटा सा शहर था उनका... इसलिए उसके पापा और भैया को हर छोटा बड़ा जानता था.. लेकिन दिल्ली की बात ही अलग है... आज़ाद पंछी हो गयी है वो... कल एडमिशन लेने जाना है.. इसलिए संजना जल्दी सो गयी.. 

दिल्ली की सुबह वैसे ही अलसायी होती है... और यहां पर ना तो पापा की आवाज़ आयी... और ना ही भैया ने उसे ज़बरदस्ती उठाया... खैर जल्दी से उठ कर तैयार हुई... और फौरन कॉलेज के लिए भागी..संजना बस स्टॉप पहुंची तो भीड़ देखकर उसकी हिम्मत नहीं हुई... कॉलेज जल्दी भी पहुंचना था.. इसलिए उसने ऑटोवाले को हाथ दिया... 

भइया... धौला कुआं चलोगे.. 

हां मैडम.. बैठो... 

कितने पैसे लोगे... 

100 रुपए मैडम...

100 रुपए.. बहुत ज्यादा है... 

अच्छा चलो आप 90 रुपए ही दे देना... ऑटो वाले ने बेहद भद्दे तरीके से घूरते हुए कहा... 

संजना को ऑटो वाले का यूं घूरना और बात करना ज़रा भी पसंद नहीं आया... उसे फौरन उसके शहर के ऑटोवाले याद आ गए... हम उम्र हुआ तो बहन जी बुलाते.. उम्रदराज़ हुए.. तो बेटी ही कहते थे.. शहर के छोटे होने के अपने फायदे और नुकसान दोनों ही हैं... रास्ते भर ऑटो में सिकुड़ी हुई बैठी रही.. बैक मिरर से ऑटोवाला लगातार उसे देख रहा था.. 

भइया सीधे देख कर चलो... वरना किसी गाड़ी से भिड़ा दोगे... 

ऑटो वाले ने अपने गंदे दांत दिखाते हुए बोला... अरे मैडम... 15 साल का था तब से ऑटो चला रहा हूं... टेंशन ना लो... देखता कहीं भी रहूं... टक्कर नहीं होगी... और आप हैं ही ऐसी की नज़रें चली ही जाती हैं... 

संजना को काटो तो खून नहीं... खैर किसी तरह संजना कॉलेज पहुंची... दिमाग में हज़ारों बातें चल रही थी... मम्मी की नसीहतें... पापा के सलाह.. और भैया का हौसला देना... छोटे शहर की लड़की थी ना.. इतने बड़े शहर में डर तो लगना ही था... खैर दिनभर एडमिशन के चक्कर में ही लग गए... शाम को थकी-हार निहारिका पीजी पहुंची... अब उसे पता चला कि.. लोग बड़े शहर में आकर छोटे शहर वालों को भूल क्यों जाते हैं... अपनी हालत ठीक रहे तब तो कुछ और भी याद आए.. 

और संजना कैसा रहा दिल्ली में पहला दिन... शेफाली ने पूछा... 

मत पूछ यार... कैसी ज़िंदगी है यहां पर... सब भागते रहते हैं... या फिर घूरते रहते हैं... सुंदर हो या बदसूरत बस उसका लड़की होना गुनाह हो गया है... जाने कैसे लोग हैं यहां पर... 

अरे तू इतने से घबरा गयी... दिल्ली है मैडम दिल्ली... यहां पर बहुत कुछ देखना पड़ता है मैडम... आप तो अभी स्टूडेंट हैं... ज़रा हम कॉल सेंटर वालों की हालत तो जान लीजिए... ना घर के हैं... ना घाट के... सारी रात जाग कर काम करते रहो.. और दिन भर उल्लुओं की तरह सोते रहो...

तो कोई ऐसी नौकरी कर ले... जो इंसानों के लिए है.. क्यों उल्लू बनी हुई है... 

यहां आदमियों की कमी है मैडम... नौकरियों की नहीं... जो भी यहां आता है.. उसके लिए कुछ ना कुछ तो दिल्ली में है हीं...और एक बार जहां फंस गए...तो समझ ले.. निकलना बेहद मुश्किल होता है... कभी दूसरी नौकरी मन मुताबिक नहीं मिलती.. तो कहीं पर बॉस की निगाहें नौकरी करने नहीं देतीं...चल छोड़ ना यार... तू मस्त रह... 

एमबीए करने के बाद कहां जाने का इरादा है... विदेश तो नहीं जाएगी ना... 

अरे नहीं यार... यहीं दिल्ली में ही कोई अच्छी नौकरी मिल जाए.. बैंक में हो जाए.. तो उससे बेहतर कुछ भी नहीं हो सकता... 

हां ये भी ठीक है... यार मेरे लिए कुछ बना दे..ज़रा मैं अपने ब्वॉयफ्रेंड से बात कर लूं... 

क्या... तेरा ब्वॉयफ्रेंड भी है... 

हां.. और क्या... 

अरे बाप रे... घरवालों को पता है.. उसके बारे में... 

पागल है क्या... ब्वॉयफ्रेंड का पता घरवालों को चल गया..तो मेरा बोरिया बिस्तर बंध जाएगा यहां से... जो आज़ादी मिली है.. वो छिन जाएगी... फिर किसी लड़के के साथ शादी कर दी जाएगी.. और मेरे सारे सपने अपना दम तोड़ देंगे... 

क्यों तो शादी नहीं करेगी... या फिर ब्वॉयफ्रेंड से ही शादी का इरादा है...

ओए... सारी बातें अभी ही जान लेगी... या कुछ कल के लिए छोड़ेगी... फिलहाल तो ब्वॉयफ्रेंड बनाने में भलाई है... शादी-वादी तो बाद में देखेंगे... 

शेफाली का जवाब सुनकर हैरान परेशान और चेहरे पर असमंजस का भाव लिए संजना किचन में घुस गयी..