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Friday, July 03, 2015

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 3


कहानी का दूसरा पार्ट यहां पढ़ें
यार मम्मी तुम्हे पता है... अक्षित भैया के जिन दोस्त ने मुझे इंटर्नशिप करायी अपनी कंपनी में... वो बिहारी हैं... 

अरे बिहारी हैं तो क्या हुआ... सारे बिहारी एक जैसे नहीं होते.. और ये क्या लगा रखा है.. बिहारी..बिहारी... हमारे यूपी में भी तो एक से एक घटिया लोग होते हैं... 

ओह हो मम्मी तुम नहीं समझोगी... ये बिहारी ना.. बस बिहारी होते हैं... वैसे रोहित सर देखने से ठीक ठाक ही लग रहे हैं.. वो जो रूचि मैम हैं ना जिनके साथ मुझे रखा गया है... वो बता रही थी.. कि वैसे तो रोहित सर इंटेलीजेंट हैं... लेकिन हैं थोड़े गुस्से वाले... मुझे तो डर ही लगा रहता है... हमारे डिपार्टमेंट की ओर आते हैं तो छुप जाती हूं.. पता नहीं कब किस बात पर डांट दें... 

ओह हो... तू भी पता नहीं क्या-क्या सोचती रहती है... अब जा... सो जा.. सुबह जाना है कि नहीं ऑफिस... टाइम पर नहीं पहुंची तो ऑफिसवाले कहेंगे.. देखो महारानी के ठाट हैं... जुगाड़ लगा के आयी हैं तो आने जाने का वक्त भी अपनी सहूलियत के हिसाब से होगा... 

हां ठीक है जा रही हूं.. लेक्चर मत दो मम्मी अब इस वक्त मुझे... झुंझलाते हुए आयशा सीढ़ियों पर जाने लगी... अपने कमरे में पहुंची तो देखा उसका छोटा कंप्यूटर पर लगा हुआ है... 

ओए बंद कर ये... सोने का टाइम हो रहा है... सुबह ऑफिस जाना है मुझे.. मम्मी ने अलग से लेक्चर दे दिया है.. और तू है कि कंप्यूटर पर लगा हुआ है..

अरे यार तो सो जाओ ना... मेरे पीछे क्यों पड़ी हो... साक्षम से तो घंटों फोन पर बात करती हो तब कोई बात नहीं... मैं ज़रा सा कंप्यूटर पर क्या बैठ गया.. मैडम हुकुम चलाने लगीं... 

देख अगर तूने अभी के अभी कंप्यूटर बंद नहीं किया तो मम्मी को बुला दूंगा.. फिर समझ लियो तू... 

अच्छा ठीक है यार.. बंद कर रहा हूं... 

बेटर... अपने भाई से झगड़ कर आयशा सीधे अपने बेड पर जा गिरी... क्या यार आजकल तो साक्षम से भी ठीक से बात नहीं हो पाती.. टाइम ही नहीं मिलता... क्या मुसीबत है यार... तभी उसे रोहित का ख्याल आ गया... वैसे हैं तो रोहित सर बिहारी ही... देखने से ही घमंडी लगते हैं... ऑफिस में भी ज्यादा किसी से बात नहीं करते... पता नहीं किस बात का घमंड है... देखती हूं.. इन्हें भी... इतना सोचते-सोचते आयशा को नींद आ गयी... 

अरे बाप रे... फिर देर हो गयी.. रूचि मैम तो मार ही डालेंगी... मम्मी जल्दी से ब्रेकफास्ट पैक कर दो यार... मैं रास्ते में ही खा लूंगी... 

आयशा तू ऐसा करेगी तो जल्दी ही हॉस्पिटल पहुंचने वाली है... 

क्या मम्मी कभी तो कुछ ठीक बोल दिया करो... मैं जा रही हूं.. बाय... इतना बोल कर आयशा घर से भाग ली... ऑफिस पहुंची तो सामने से रोहित आता हुआ दिख गया... 

हैलो रोहित सर... 

हैलो आयशा.. कैसी हो.. क्या चल रहा है... कुछ सीखा अभी तक या नहीं.. या सिर्फ मस्ती ही हो रही है... 

अरे नहीं सर... रूचि मैम से सीख रही हूं... 

गुड... सीख लो जल्दी...अभी तो इंटर्नशिप है... बाद में कहीं जॉब लग गयी तो चार गुनी मेहनत करनी पड़ेगी... 

जी सर बिल्कुल...

अरे रोहित... मेरे इंटर्न से क्या पूछताछ हो रही है... रूचि ने अपना बैग डेस्क पर रखते हुए पूछा.. 

नहीं भाई.. यूं ही हाल चाल पूछ रहा था... चलो भाई मैं ज़रा बॉस के पास जा रहा हूं... काफी देर से बुला रहे हैं... पता नहीं क्या पूछने वाले हैं.. 

रोहित के जाने के बाद रूचि ने आयशा से पूछा... क्या पूछ रहा था.. 

अरे कुछ नहीं मैम.. यही कि क्या सीखा... जल्दी जल्दी सीखो.. वरना जॉब में मुश्किल आएगी.. चार गुना काम करना पड़ेगा.. 

हा हा हा.. अरे लेक्चर देने में माहिर है ये... कुछ भी बात कर लो... सबका ज्ञान है इसके पास... क्रिकेट हो... साइंस हो... लफ्फाज़ी हो.. कुछ भी छेड़ दो.. हर बात पर इसके पास कुछ ना कुछ है कहने को... 

हां मैम... बिहारी जो ठहरे... हर जगह टांग अड़ाएंगे ही... 

ओए.. ऐसा नहीं कहते... बहुत इंटेलीजेंट है रोहित... बकवास बातें बिल्कुल नहीं करता.. और तुझसे तो थोड़ी सी बात भी कर ली.. ऑफिस की लड़कियों से तो हाय-हैलो तक नहीं करता... चल ज़रा ये थोड़ा सा काम पड़ा है.. इसे निपटाते हैं.. 

ओके मैम... इतना कहकर आयशा अपनी डेस्क की ओर मुड़ गयी.. और सोचने लगी.. भइया यानि इन बिहारी बाबू में इगो खूब है... ठीक है... हम भी कम नहीं हैं... देखते हैं... 

लंच टाइम पर कैंटीन में आयशा जब पहुंची तो देखा रोहित और रूचि खाना खा रहे हैं.. सो वो भी उसी टेबल पर बैठ गयी... बातों ही बातों में आयशा ने रोहित से पूछा सर आपकी शादी हो गयी... 

शादी.. क्यों... 

नहीं वैसे ही पूछा... सोच रही थी... अगर आप शादी शुदा हुए तो आपकी पत्नी आपको कैसे झेलती होंगी... आप तो ऑफिस में बिल्कुल चुपचाप बैठे रहते हैं.. ऐसा लगता है मानो कंप्यूटर सिर्फ आपके लिए ही बना हो... आस-पास से गुज़र भी जाओ तो आपको पता ही नहीं लगता... 

हा हा हा.. नहीं ऐसी बात नहीं है... ऐसे ही काम करने की आदत है मुझे... और हां.. फिलहाल तो शादी शुदा नहीं हूं... लेकिन जल्दी ही होने वाली है... दिसंबर में शादी हो जाएगी मेरी... 

सच में.. आप मज़ाक तो नहीं कर रहे... कांग्रेट्स सर... 

अरे रोहित मज़ाक कम करता है.. और कम से कम शादी के मामले में तो नहीं ही करेगा.. क्यों है ना रोहित.. 

हा हा हा हा हा.. हां भाई सच में मेरी शादी होने वाली है... थैंक्यू सो मच... 

अच्छा तो बच्चू अब फंसने वाले हैं... वैसे लगते खड़ूस हैं.. लेकिन हैं नहीं... नेचर तो अच्छा लग रहा है... ऑफिस के भीतर कुछ और लगते हैं... और यहां लंच टेबल पर कुछ अलग ही नज़र आ रहे हैं... हो सकता है प्रोफेशनली मजबूरी हो ऐसे रहने की... मन ही मन आयशा रोहित से थोड़ी इंप्रेस हो गयी... अब रोहित के देखते वक्त उसे बिहारी याद नहीं आता था.. अब वो समझ गयी थी.. कि सारे बिहारी एक जैसे नहीं होते... मुस्कुराते हुए उस अपना खाना खत्म किया और फिर लंच बॉक्स लेकर अपनी डेस्क की ओर बढ़ चली... 

रात में जब आयशा सोने पहुंची तो उसे रोहित सर का चेहरा नज़र आ रहा था... वो समझने की कोशिश कर रही थी.. कि ऑफिस के भीतर के रोहित में और आज जो लंच टेबल पर रोहित नज़र आया.. उसमें क्या फर्क था... और क्यों वो रोहित के बारे में इतना सोचने लगी है...