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Thursday, July 02, 2015

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट -1



बहुत दिनों बाद कहानी का एक प्लाट मिला है... लिखने की शुरुआत की है... देखते हैं कहानी जाती कहां तक है... वक्त मिले तो कहानी ज़रूर पढ़ें... और इस पर अपने कमेंट भी दें.. हौसला बढ़ेगा... 

हैलो... हां.. भइया बोलो... फोन कान  पर टिकाकर कंधे से रोकती हुई... आयशा ने बोला... 

दूसरी ओर से आवाज़ आयी.. अरे तू जा रही है ना.. मैने रोहित को बोल दिया है... तेरा काम हो जाएगा.. 

हां ठीक है.. वहीं जा रही हूं... भइया एक बात बताओ.. ये आपके दोस्त रोहित खड़ूस तो नहीं हैं ना... आयशा ने मज़ाकिया लहज़े में पूछा... 

अरे नहीं.. तू जा के मिल.. भला इंसान है... मैंने उसे बोल दिया है... तुझे इंटर्नशिप करनी है... वो करा देगा...

आयशा ने कहा.. ठीक है भइया.. जैसा भी होता है मैं आपको बताती हूं... बाय..

पता नहीं यार ये रोहित जी होंगे कैसे... भइया के दोस्त हैं तो ठीक ही होंगे... आयशा ने बुदबुदाते हुए अपना पर्स बंद किया और मम्मी को आवाज़ लगाते हुए  बोली.. 

मम्मी मैं जा रही हूं.. पता नहीं वहां कितना टाइम लग जाए... मैं आपको बताती हूं वहीं पहुंच कर... 

ठीक है बेटा.. ध्यान से जाना... और जिससे मिलने जा रही है उससे ज़रा ठीक से बात करना... कॉलेज नहीं है वो तेरा.. जहां जो मन में आया बोल दिया.. सलीके से बात करना... 

ठीक है मां... आप चिंता मत करो.. बच्ची नहीं हूं मैं... वैसे भी भइया के दोस्त हैं तो ज्यादा टेंशन नहीं है... 
आयशा घर से निकली... मेट्रो पकड़ी.. और पहुंच गयी नोएडा सेक्टर 15... वहां से ऑटो लिया और बोला.. भइया डी ब्लॉक में इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स के ऑफिस ले चलो... 

जी मैडम.. 

ऑटो में बैठी-बैठी आयशा सोच रही थी... यार इंटर्नशिप मिल जाए... तो करियर की शुरुआत हो... दो महीने से अलग-अलग ऑफिसेज़ में धक्के खा रही है.. लेकिन इंटर्नशिप नहीं मिल रही... कमबख्त कॉलेज वाले भी एडमिशन के वक्त तो पता नहीं क्या-क्या सपने दिखाते हैं.. और जब बारी कॉलेज से निकलने की होती है तो जैसे उन्हें किसी से कोई मतलब ही नहीं... 

मैडम.. आ गया इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स का ऑफिस... 

कितना हुआ भइया.. 

मैडम 60 रु... 

क्या 60 रु कैसे हुए भइया... 2 किलोमीटर भी तो नहीं था सेक्टर 15 मेट्रो स्टेशन से... 50 रु से ज्यादा नहीं दूंगी... 

ठीक है मैडम.. 50 ही दे दीजिए... 

आयशा रिसेप्शन पर पहुंची तो वहां एक लड़की बैठी मिली... 

हैलो मैम.. मुझे... रोहित जी से मिलना है... 

ओके.. क्या नाम है आपका...

जी आयशा... 

रोहित जी को पता है कि आप यहां पर आ रही हैं... 

जी उन्हें पता है... 

ठीक है आप वहां बैठ जाइए... मैं बात करती हूं..

हैलो.. रोहित जी... आपसे मिस आयशा मिलने आयी हैं... अच्छा.. ठीक है... 

आयशा जी.. प्लीज़ आप थोड़ी देर वेट करें... रोहित जी आपसे अभी आ कर मिलेंगे...

ओके.. थैंक्स... 

आयशा ने मन ही मन सोचा...रोहित राज.. हां.. भइया ने यही नाम बताया था... उन्होंने तो यही बोला था कि उसे पक्का इंटर्नशिप मिल जाएगी.. उनका बहुत करीबी दोस्त है... देखते हैं क्या होता है.. पता नहीं क्या-क्या पूछेंगे ये मिस्टर रोहित... देखने में कैसे होंगे... कम से कम 30-35 साल के आस-पास ही होंगे.. भइया की भी तो करीब इतनी ही उम्र है... भगवान जाने क्या होगा... 

कहां रह गए ये मिस्टर रोहित... इंतज़ार करते हुए 20 मिनट हो चुके हैं.. यार इन उम्रदराज़ लोगों के साथ ना यही दिक्कत है... 20 मिनट हो गए बैठे हुए... लेकिन भाई साहब का अता-पता नहीं है...

एक्सक्यूज़ मी... क्या आप ही हैं आयशा शर्मा... 

जजजजजी... सर.. मैं ही हूं... आयशा ये कहते हुई उठी और तभी उसका फोन धड़ाम से फर्श पर जा गिरा... 

सससससॉरी सर... आय एम वेरी सॉरी सर... अपना बिखरा हुआ फोन समेटते हुए घबरायी आयशा ने कहा.. 

अरे.. आराम से.. रिलेक्स... 

हां तो आयशा.. आपको इंटर्नशिप करनी है... अक्षित ने बोला था आपके बारे में... कहां से पढ़ाई कर रही थी... 

जजजजी.. सर... जेएसएस कॉलेज... बीटेक इन कंप्यूटर साइंस... 

ओके... गुड... ठीक है.. अपना रिज्यूमे मुझे दे दो... फिर मैं तुम्हें बताता हूं... तुम्हारा काम हो जाएगा... डोंट वरी... 

थैक्यू सर... इतना कहकर आयशा ऑफिस से वापस आने लगी... यार इन्होंने तो कुछ पूछा ही नहीं... लगता है यहां भी कुछ नहीं होने वाला... भइया को बताती हूं... 

हैलो... भइया.. यार यहां तो तुम्हारे रोहित राज जी ने कुछ पूछा ही नहीं.. सिर्फ कॉलेज का नाम पूछा.. रिज्यूमे लिया.. और बोला कि ठीक है बताता हूं... क्या मतलब हुआ इसका..

अरे तू चिंता मत कर.. हो जाएगा... मेरी बात हो गयी है.. और तू मेरी बहन लगती है... चचेरी ही सही.. लेकिन वो भी मेरा बेहद करीबी दोस्त है... तेरा काम हो जाएगा.. 

ठीक है... देखती हूं.. कल बोला है बताने को... 

अरे समझ ले तेरी इंटर्नशिप हो गयी वहां पर... टेंशन मत ले... 

ओके ठीक है.. बाय...