मुझसे जुड़ें

Thursday, July 30, 2015

पहले इस जनसंख्या बम को तो काबू में कर लें


ए भाई बेहद चिंता वाली खबर आ रही है. यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक भारत इस दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश बन जाएगा... चीन को पीछे छोड़ते हुए हम सबसे ज्यादा आबादी वाली नंबर एक की कुर्सी पर बैठ जाएंगे... रिपोर्ट के मुताबिक तो ये भी बात सामने आ रही है कि अगले सात सालों में ही हम चीन को पीछे छोड़ देंगे...

- जनसंख्या में भारत 2022 में ही चीन को पीछे छोड़ देगा

- 2015 से 2050 तक बढ़ने वाली जनसंख्या में आधे से ज्यादा का योगदान भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान, कांगो, इथोपिया, तंजानिया, अमेरिका, इंडोनेशिया और युगांडा का होगा

- यूनाइटेड नेशंस की इस रिपोर्ट के मुताबिक 35 साल के भीतर इस दुनिया की जनसंख्या करीब 2 अरब 40 करोड़ बढ़ जाएगी

- साल 2050 तक दुनियाभर में 9 अरब 70 करोड़ लोग हो जाएंगे

- साल 2100 तक तो दुनिया की जनसंख्या 11 अरब 20 करोड़ को भी पार कर जाने की बात कही गयी है

- 2050 तक अफ्रीका के 28 देशों की जनसंख्या दोगुनी हो जाएगी

- 35 साल के भीतर नाइजीरिया की जनसंख्या अमेरिका से भी ज्यादा हो जाएगी

CHANGING OF THE GUARD: THE TOP FIVE MOST POPULATED COUNTRIES

                   2015 2050 2100

1. China – 1.4million 1. India – 1.7million 1. India – 1.7million
2. India – 1.3million 2. China – 1.3million 2. China – 1.0million
3. USA – 322,000 3. Nigeria – 399,000 3. Nigeria – 752,000
4. Indonesia – 258,000         4. USA – 389,000 4. USA – 450,000
5. Brazil – 208,000 5. Indonesia – 322,000 5. DR Congo – 389,000
                 
कहने का मतलब ये है कि इतनी सारी योजनाओं के बाद भी हमारी जनसंख्या काबू में नहीं आ रही, ऐसा ही जारी रहा तो वो दिन दूर नहीं जब संसाधनों के लिए जंग छिड़ जाएगी, रोटी इतनी महंगी हो जाएगी कि गरीबों में भूखमरी के हालात पैदा हो जाएंगे, उत्पादन उन अनुपात में नहीं हो पाएगा जिस अनुपात में हमारी जनता को चाहिए, तो जागो हिंदुस्तानियों जागो, वरना ये ना कहना कि इसकी गलती भी सरकार की ही है




                 


Monday, July 27, 2015

शहादत


आज फिर कुछ घरों के चूल्हे चुप हैं...
आज फिर कुछ मांगों के सिंदूर धुल गए हैं...
आज फिर कुछ बापों के कलेजे छलनी हुए हैं...
आज फिर कुछ सहमी निगाहें अपने पापा को देख रही हैं...
सवाल है इन डरी-डरी आंखों में.....
पापा चुप-चाप क्यों सो रहे हैं....
मम्मी की आंखें पथराई सी क्यों हैं...
दादाजी के कंधे इतने उतरे से क्यों हैं...
दादी के आंसू क्यों नहीं रुक रहे...
कुछ लोगों को उधऱ कोने में कहते सुना है...
मेरे पापा अमर हो गए हैं....
मेरे पापा शहीद हो गए हैं...
छोटी बहन मुझसे पूछती है....

भइया... ये शहीद होना क्या होता है... 

©Alok Ranjan

Sunday, July 19, 2015

सासंदों की सब्सिडी और जनता का शपथ अभियान


यूं तो हमारी आदत है कि हम जनता के साथ ही रहते हैं... उनकी आवाज़ों को अपना मानते हैं... उनकी हांक में हांक मिलाते हैं... लेकिन इस बार ज़रा हम सटक गए हैं... थोड़ा सा बिदक गए हैं... मतलब ये कि भाई साहब भेड़ चाल में शामिल होने पर अब हमें थोड़ा-थोड़ा एतराज़ होने लगा है... दरअसल मियां कुछ बात यूं हो गयी कि पिछले कुछ दिनों से फेसबुक से लेकर व्हाट्स एप तक.. लोगों ने बात-बात पर शपथ लेनी शुरु कर दी है... हम शपथ लेते हैं कि ब्ला-ब्ला-ब्ला-ब्ला... और फिर जहां एक बार शपथ लेने की परंपरा शुरु होती है... उसके पीछे-पीछे जनता टूट पड़ती है... अब मियां उन्हें कौन समझाए कि भाई ज़रा देख लो... सोच लो... समझ लो... अब देखिए ना... महीने में चार एक्स्ट्रा मेहमान अगर घर पर आ जाएं और उन्हें खिलाना पिलाना पड़े तो भाई बजट का लाल रंग का बजर घों-घों करके बजने लगता है... और खुदा ना खास्ता कोई पर्व-त्योहार आ जाए तो करेला ऊपर से नीम चढ़ा हो जाता है... ऐसा ही कुछ हमारे माननीय सांसदों के साथ हो रहा है...

कहने का मतबल ये है कि पिछले 68 सालों से एक सिस्टम बना है... अब ये सिस्टम काहे बना.. क्यों बना... इसके पीछे की अपनी वजहें हैं... लेकिन सिस्टम बना हुआ है... हालांकि ये भी ठीक है कि वक्त के साथ सिस्टम में थोड़ा बदलाव होना चाहिए... लेकिन सिस्टम अभी भी पुराने ढर्रे पर चल रहा है... वैसे तुलना की जाए तो हमारे सांसदों का वेतन उतना नहीं है... जितना दुनिया के कई देशों में है... लेकिन यहां पर ये भी है कि हमारे सांसदों को जितनी सुविधाएं (सब्सिडी) मिलती है उतनी और कहीं नहीं मिलती... खैर बात हो रही थी सांसदों के वेतन की... ब्रिटेन में एक सांसद को बेसिक वेतन के तौर पर करीब 64 हज़ार पाउंड यानि भारतीय रुपए में कहें तो करीब 63 लाख रुपए मिलते हैं... सिंगापुर में ये रकम करीब 20 हज़ार डॉलर यानि करीब 12 लाख रुपए है... अमेरिका में तो करीब एक करोड़ है...

देश
सांसदों का कुल वेतन (रुपए)
प्रति व्यक्ति आय (रुपए)
भारत
35 लाख
99 हजार
इटली
1.11 करोड़
12 लाख
जापान
1.64 करोड़
1.05 करोड़
न्यूजीलैंड
71.58 लाख
15.51 लाख
अमेरिका
1.07 करोड़
26.98 लाख
फ्रांस
52 लाख
14.62 लाख
जर्मनी
73 लाख
21.96 लाख
आयरलैंड
73 लाख
22.50 लाख
यूके
65 लाख
20.83 लाख
ऑस्ट्रेलिया
1.19 करोड़
39.24 लाख

हालांकि मैं यहां पर सांसदों की तनख्वाह बढ़ाने या फिर उनको मिल रही सब्सिडी को जायज़ ठहराने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं कर रहा... मेरा तो मानना है कि भाई रोज़ का रोना छोड़ो कोई मुकम्मल उपाय कर दो... जैसे की हमारी नौकरी में है... भाई आपकी सैलरी फिक्स है... फिर आप उसका जिस तरह से इस्तेमाल करना चाहें कर सकते हैं... घर पर रोज़ लोगों को बुलाइए पार्टी दीजिए.. या फिर चुपचाप अपना घर चलाइए... लेकिन चूंकि हमारे सांसद ऐसा नहीं कर सकते.. क्योंकि अगर उनके घर या दफ्तर पर पहुंचा एक भी आदमी हमारी शादियों में फूफाजी/चाचाजी/बाबाजी की तरह बिना चाय पिए बिदक गया तो समझ लीजिए 5-10 वोट तो उसके गए... इसलिए बेचारे सांसद को अपने यहां आए हर किसी को चाय-पानी और खाने के लिए पूछना ही पड़ेगा... अपने क्षेत्र के लोगों को वो कत्तई मना नहीं कर सकता... अब उस बेचारे की भी अपनी मजबूरी है... आखिर वोट के लिए तो उसे अपनी जनता के बीच भी जाना पड़ेगा... अमूमन जनता इस बात को याद नहीं रखती की सांसद जी ने सड़क बनवाने का वादा जो किया था वो अब तक पूरा नहीं हुआ है... लेकिन ये ज़रूर याद रखती है कि सांसद जी के यहां गए थे तो चाय भी नहीं पिलाया...


वैसे ये बात भी अलग नहीं है कि जैसे ही कोई सांसद बनता है... अगले पांच साल में उसकी सुख-समृद्धि और संपत्ति में उछाल शेयर बाज़ार को भी मात दे देता है... और उसके नीचे गिरने का तो सवाल ही नहीं होता.. यहां पर सूचकांक बस ऊपर ही बढ़ता जाता है... एक साहब ने तो मुझे राय दी की क्यों नहीं सरकार सांसदों से सारी सुविधाएं छीन लेती है... और उसके वेतन को कॉरपोरेट कल्चर के हिसाब से फिक्स कर दिया जाए.. और सांसद अपने वेतन के हिसाब से करता रहे खर्चा... वैसे फिर मेरे दिमाग में ये बात आयी कि भाई फिर तो सांसदों को कॉरपोरेट कल्चर के हिसाब से योग्यता भी साबित करनी पड़ेगी... मतलब दसवीं फेल होने पर तो सांसद बनना मुश्किल होगा ना...  

Wednesday, July 15, 2015

इमरान खान की बीवी और बीबीसी की पूर्व प्रेजेंटर फर्ज़ी पत्रकार निकलीं



तो कुल जमा खबर ये मिल रही है कि पाकिस्तानी क्रिकेटर इमरान खान की ताज़ातरीन बेगम साहिबा रेहम खान ने बीबीसी वालों से ही झूठ बोला और फर्ज़ीवाड़ा किया... अब बेचारे बीबीसी वालों ने जांच तब शुरु की जब बेगम साहिबा उन्हें बेवकूफ बना गयीं... रेहम खान की पत्रकारिता की डिग्री फर्ज़ी निकली है... उन्होंने जिस कॉलेज से पत्रकारिता की डिग्री हासिल करने का दावा किया था दरअसल उस कॉलेज ने इससे साफ इंकार कर दिया है कि ऐसा कोई कोर्स वो कराते भी हैं... यही नहीं कॉलेज ने तो इस बात से भी इंकार कर दिया है कि उनके यहां पत्रकारिता भी पढ़ाई जाती है... इमरान खान की बेगम साहिबा ने अपनी वेबसाइट के साथ-साथ बीबीसी को जो दस्तावेज़ दिए थे उनमें कहा गया था कि Broadcast Journalism में पोस्ट ग्रैजुएट कोर्स North Lindsay [sic] College, Scunthorpe, Lincolnshire से किया है... अब जब जांच की गयी तो पता चला कि कॉलेज में इस कोर्स की तो छोड़िए पत्रकारिता की पढ़ाई ही नहीं होती है... वैसे इन मोहतरमा का इतिहास भी इमरान खान से कम नहीं है... मैडम अपने पहले पति पर जो कि ब्रिटेन के जाने माने डॉक्टर हैं उनपर घरेलू हिंसा के आरोप लगा चुकी हैं... इमरान खान की दूसरी पत्नी जेमिमा ने दो बेटे हैं... पहली पत्नी सीता व्हाइट से एक बेटी है... इधर रेहम खान की पहली शादी से तीन बच्चे हैं...

Monday, July 13, 2015

42 की उम्र में 22 के लिएंडर पेस



बढ़ती उम्र क्या होती है ये शायद हमारे टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस को नहीं पता... कोर्ट पर उनकी चुस्ती-फुर्ती आज भी उतनी ही नज़र आती है जितनी 1990 में जूनियर विंबलडन खेलते वक्त दिखाई देती थी... जूनियर विंबलडन के चैंपियन बनने की खबर मुझे तब मिली थी जब मैं 10 साल का था... हमारे घर में अखबार एक दिन की देरी से आता था क्योंकि तब गांव में अखबार का उसी दिन आना किसी जादू से कम नहीं होता था... ठीक तरह से याद नहीं लेकिन शायद आज अखबार था... बचपन से ही खेल का पेज मुझे बेहद आकर्षित करता था... और ब्लैक एंड व्हाइट में लिएंडर पेस की तस्वीर छपी थी... आज रंगीन पेपर में जब उनकी तस्वीर देखी तो 25 साल पुरानी लिएंडर की वहीं तस्वीर आंखों के सामने नाच गयी... उस वक्त उतनी समझ नहीं थी कि विंबलडन जीतने का मतलब क्या होता है.. लेकिन आज पता है कि विंबलडन जीतना किसी भी टेनिस खिलाड़ी के लिए कितना मायने रखता है... पेस 42 के हो चुके हैं... उनके साथ खेलना शुरु करने वाले की खिलाड़ी रिटायरमेंट ले चुके हैं... लेकिन पेस कोर्ट पर अभी भी ना सिर्फ डटे हुए हैं... बल्कि जीतने की भूख अभी भी उतनी ही नज़र आती है जितनी पहले थी... पेस ने ढेरों उतार चढ़ाव देखे.. 21 जून 1999 को डबल्स में वो दुनिया के पहले नंबर के खिलाड़ी बने थे... तब उनका करियर अपनी ऊंचाईयों पर था... और करीब 16 साल बाद उनकी इस वक्त रैंकिंग डबल्स में 27वीं हैं... सुनने में ये बात ज्यादा बड़ी ना लगती हो... लेकिन खेल प्रेमी जानते हैं कि टेनिस में 42 साल की उम्र में भी इस रैंकिंग तक बरकरार रहना कोई छोटी-मोटी बात नहीं है... 1996 के अटलांटा ओलंपिक में पेस ने जब ब्रांज मेडल जीता था तब वो भारत के पहले खिलाड़ी बने जिसने व्यक्तिगत स्पर्धा में चार दशकों बाद मेडल विनर बने थे... क्रिकेट में जिस तरह पिच खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर असर डालती है... उसी तरह टेनिस में भी ये बात बेहद अहम है कि मैच किस तरह के कोर्ट पर खेला जा रहा है... लेकिन पेस के बारे में ये कहा जा सकता है कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि वो हार्ड कोर्ट पर खेल रहे हैं.. ग्रास कोर्ट पर या क्ले कोर्ट पर... या फिर कारपेट कोर्ट पर... उन्होंने हर सरफेस वाले कोर्ट पर जीत दर्ज की है... डबल्स में पेस के नाम 8 ग्रैंड स्लैम हैं जबकि मिक्स्ड डबल्स में इस साल के विंबलडन टाइटल को मिलाकर 9 ग्रैंड स्लैम हो चुके हैं,... डबल्स में फ्रेंच ओपन और यूएस ओपन तीन-तीन बार जीते.... जबकि ऑस्ट्रेलियन ओपन और विंबलडन का खिताब एक-एक बार अपने नाम किया... वहीं मिक्स्ड डबल्स में सबसे ज्यादा चार बार विंबलडन का खिताब अपने नाम किया है... ऑस्ट्रेलियन ओपन तीन बार... फ्रेंच और यूएस ओपन एक-एक बार जीता है... यानि कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि भारत में टेनिस का मतलब ही लिएंडर पेस है... और शायद ये पेस का करिश्मा ही है कि आज सानिया मिर्ज़ा... रोहन बोपन्ना... सोमदेव बर्मन.. सुमित नागल जैसे खिलाड़ी भी उन्हीं के नक्शेकदम पर चल रहे हैं... 

Saturday, July 11, 2015

चलो कहीं तो चीन को मात दे पाएं हम



वैसे तो चीन से हम जनसंख्या के साथ-साथ करीब-करीब हर फील्ड में हमेशा पीछे रहते आए हैं... हालांकि ये बात अलग है कि जनसंख्या विस्फोट के मामले में हम निकट भविष्य में चीन को पछाड़ देंगे... लेकिन इसके परिणाम क्या होंगे.. ये आप और हम अच्छी तरह जानते हैं... लेकिन पिछले कुछ साल में या यूं कहें कि पिछले तीन-चार साल में बैडमिंटन में जिस तरह से हमने चीनी चुनौती को धवस्त किया है वो काबिलेगौर है... 2014 के चीन ओपन में ऐसा पहली बार हुआ जब पुरुष और महिला दोनों के सिंगल्स मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ियों की जीत हुई... मेन्स सिंगल्स में श्रीकांत किदांबी और महिला सिंगल्स में सायना नेहवाल चैंपियन बने... सायना और श्रीकांत का जीतना इस मायने में भी बेहद अहम है क्योंकि 2003 से लेकर 2013 तक चीन दोनों ही मुकाबलों में कभी नहीं हारा था... 2001 में पुलेला गोपीचंद ने ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीती थी... उसके बाद अब तक हुए 14 में से 10 बार ये खिताब चीन के खिलाड़ियों के पास गया है... हालांकि इस साल महिला सिंगल्स में पहली बार अपनी सायना नेहवाल फाइनल में पहुंची लेकिन वो इसे जीत नहीं पायीं... लेकिन इसके बावजूद भी सायना की उपलब्धि इसलिए भी बड़ी थी क्योंकि क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में जिस तरह उन्होंने चीनी खिलाड़ियों को हराया उसने चीन में खलबली मचा दी... हालांकि इसकी शुरुआत 2009 में इंडोनेशिया ओपन से ही हो चुकी थी.. जब सायना ने लगातार दो साल तक चीनी खिलाड़ियों सहित दुनिया की दूसरी बड़ी खिलाड़ियों को हराकर खिताब पर कब्ज़ा किया... कुछ दिनों पहले तक सायना दुनिया की नंबर वन खिलाड़ी की कुर्सी पर काबिज़ थी.. जो किसी भी भारतीय शटलर के लिए बड़े ही गर्व की बात है.. फिलहाल सायना की रैंकिंग नंबर दो की है... सायना और श्रीकांत के अलावा इस वक्त भारतीय शटलर्स ने पूरी दुनिया पर अपनी अलग छाप छोड़ रखी है... पी कश्यप के गेम के दीवाने पूरी दुनिया में हो चुके है... उनकी तेज़ी और ताकत दोनों मिलकर उनके खेल को अलग मुकाम पर पहुंचा देते हैं... 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज और ग्लासगो 2014 में कश्यप ने गोल्ड जीता... 2012 लंदन ओलंपिक में कश्यप भारत के पहले खिलाड़ी बने जो मेन्स सिंगल्स के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे... क्वार्टर फाइनल में वो दुनिया के पूर्व नंबर एक खिलाड़ी मलेशिया के ली चोंग वेई से हारे... वहीं श्रीकांत किदांबी ने भी दुनिया को ये बताया कि बैडमिंटन में अब भारतीय खिलाड़ियों को कमतर नहीं आंका जा सकता... 2013 से लेकर 2015 तक श्रीकांत ने चार बड़े खिताब अपने नाम किए... थाइलैंड ओपन... चीन ओपन.. स्विस ओपन.. और इंडिया ओपन... फिलहाल श्रीकांत की रैंकिंग तीसरी है.. यानि दुनियाभर में फिलहाल श्रीकांत तीसरे नंबर के खिलाड़ी हैं... जबकि कश्यप की रैंकिंग 10वीं है.. वहीं ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा की चर्चा किए बगैर अपनी बात खत्म करना ठीक नहीं होगा.. दोनों ने अभी कुछ दिनों पहले ही कनाडा ओपन का डबल्स का खिताब जीता है... और फिलहाल उनकी रैंकिंग 13वीं है... पांच पहले तक दुनिया को सिर्फ दो नाम ही याद थे... एक प्रकाश पादुकोण और दूसरे पुलेला गोपीचंद... बैडमिंटन में भारतीय खिलाड़ियों की चुनौती को बहुत हल्के में लिया जाता था...लेकिन पिछले पांच साल में तस्वीर बदल चुकी है...इस वक्त दुनियाभर में बैडमिंटन के खिलाड़ी भारतीय प्लेयर्स को ना सिर्फ बेहद मज़बूत विरोधी मानते हैं.. बल्कि उनका सम्मान भी करते हैं... चीन जैसे देश जिन्हें खेलों की फैक्ट्री का खिताब हासिल है.. वहां भी भारत का बढ़ता कद चर्चा का विषय बना हुआ है... बैडमिंटन में चीनी खिलाड़ियों को सबसे मुश्किल विरोधी कहा जाता है.. सबसे मज़बूत दीवार कहा जाता है.. उस मुश्किल को... उस दीवार को भारतीय खिलाड़ियों ने तोड़ दिया है... बैडमिंटन जैसे खेल में भारतीयों का इस तरह काबिज़ होना ये बताता है कि हमारे देश में अब बैडमिंटन का स्तर कितना ऊपर पहुंच चुका है.. और इसके लिए कम से कम पुलेला गोपीचंद को श्रेय देना तो बनता है... 

Sunday, July 05, 2015

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 6


कहानी का पांचवां पार्ट यहां पढ़ें
रोहित जब घर पहुंचा तो शादी की तैयारियां ज़ोरों पर थीं... अगले चार दिन में उसकी शादी हो जानी थी... इधर जब से रोहित गया था.. आयशा बड़ी रिज़र्व सी रहने लगी थी.. अपने ब्वॉयफ्रेंड साक्षम के साथ भी उसकी बातचीत बेहद कम हो गयी थी... हालांकि उसके मम्मी पापा को इस बात का ज़रा भी अहसास नहीं था कि वो किस दौर से गुज़र रही थी... आयशा भी खुद समझ नहीं पा रही थी.. कि आखिर ये क्यों हुआ.. और कैसे हुआ... वो बीते हुए कुछ महीनों को याद कर रही थी... कि तभी फोन की घंटी बजी.. देखा तो रोहित का फोन था... 

हाय रोहित सर... कैसे हैं आप.. कैसी चल रही हैं शादी की तैयारियां... 

हे... आयशा .. कैसी हो यार... यहां पर तो तैयारियां ज़ोर शोर से चल रही हैं... पूजा पे पूजा हुए जा रही है... पता नहीं कितनी सारी रस्में हैं.. बिहार में शादियां तो कई दिनों तक चलती हैं ना... तुम बताओ... मिली कहीं जॉब तुम्हें... 

अरे अभी कहां सर... लेकिन हो सकता है कि मिल जाए... आईबीएम से रिस्पांस आया है... परसों इंटरव्यू है... 

अरे यार परसों तो मेरी शादी है... चलो अच्छा है... मुझे पूरा भरोसा है कि तुम्हें वहां जॉब ज़रूर मिल जाएगी... 

हां सर... मुझे भी लग रहा है... चलो सर आप अपनी रस्में निभाओ... मम्मी बुला रही हैं... बाद में बात करती हूं आपसे... 

ओह हो... चलो ठीक है... इतना कहकर रोहित ने फोन काट दिया... रोहित को आयशा का यूं कहना कुछ ठीक नहीं लगा... लेकिन वो जानता था कि उसके और आयशा के बीच जो कुछ भी है... उसके बाद आयशा का उसका फोन उठाना ही काफी है... 

उधर आयशा की आंखें भी डबडबा आयी थीं... वो सोच रही थी..काश कुछ महीने पहले रोहित सर से मुलाकात हो जाती... साक्षम उसका ब्वॉयफ्रेंड ज़रूर है... वो उससे प्यार भी करती है... लेकिन शायद वो बचपने वाला प्यार है... क्योंकि एक तो साक्षम के घरवाले उसके खिलाफ हैं.. दूसरे साक्षम में अभी उतनी मेच्योरिटी नहीं आयी है... जितनी खुद उसमें है... इसलिए दोनों के मेंटल लेवल में भी फर्क है... रोहित के लिए जो कुछ भी वो महसूस कर रही है... वो कुछ खास है... क्योंकि यहां ना सिर्फ दोनों की सोच भी मिलती है.. बल्कि कभी-कभी तो दोनों की बातें भी ज़बान से एक जैसी ही निकलती हैं... 

रात में रोहित का फिर फोन आया... आयशा फोन उठाना तो चाहती थी.. लेकिन किसी तरह दिल पर पत्थऱ रखकर उसने फोन नहीं उठाया... अगले दिन सुबह फिर रोहित का फोन आया... इस बार आयशा फोन को इग्नोर नहीं कर पायी... 

हैलो मैडम... क्या हो गया है... रात को फोन नहीं उठाया..कितनी सारी बातें तुम्हें बतानी थी यार... 

हाय सर... गुड मॉर्निंग... कल तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी... जल्दी सो गयी थी.. इसलिए नहीं उठा पायी... 

अरे हुआ क्या है तुम्हें.. तुम्हारी आवाज़ से तो लग रहा है... तुम्हारी तबीयत अभी भी ठीक नहीं है... 

नहीं सर.. अब तो थोड़ा ठीक है... आयशा ने झूठ बोलते हुए.. अपनी रुलाई को छुपाने की कोशिश की... 

अच्छा चलो शाम को मेरी बारात है... फोन करुंगा.. तबीयत ठीक रही तो उठा लेना... टेक रेस्ट एंड टेक केअर... बाय-बाय

ओके सर बाय-बाय.. और हां कांग्रेट्स... इतना कहकर आयशा ने फोन काट दिया... गला रूंध चुका था... वो ज़ोर-ज़ोर से रोना चाह रही थी... तकिए में सिर छुपा कर थोड़ी देर वो रोती रही... जिससे उसे प्यार हुआ था.. जिसका साथ उसे पिछले कुछ महीनों में अच्छा लगने लगा था... जिसके बारे में सोचते ही उसे लग रहा था कि ये बंदा बिल्कुल परफेक्ट है... अब चंद घंटों में उसकी शादी होने वाली थी... उसे ये भी पता था... कि रोहित को भी उससे प्यार हो गया है.. लेकिन साथ ही उसे ये भी पता था.. कि तीन महीने के प्यार के लिए वो छह महीने पुरानी तय की गयी अपनी शादी नहीं तोड़ सकता... अब कुछ भी नहीं किया जा सकता था... 

तभी आयशा के कानों में उसकी मम्मी की आवाज़ पड़ी... 

अरे आयशा.. तुझे इंटरव्यू के लिए नहीं जाना क्या... नौ बज गए हैं... 11 बजे इंटरव्यू है ना तेरा... कब तैयार होगी.. कब जाएगी... 

ओ शिट... अरे यार मैं अपना इंटरव्यू कैसे भूल सकती हूं... शिट यार... हां मम्मी बस निकल रही हूं... इतना कहते-कहते वो दौड़ते हुए बाथरुम में घुस गयी... 

आयशा जब इंटरव्यू देकर बाहर निकली तो उसके चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी... आईबीएम जैसी बड़ी कंपनी में उसे जॉब मिल गयी थी... लेकिन साथ ही साथ थोड़ा दुख भी था... क्योंकि एक महीने बाद उसे अमेरिका जाना पड़ेगा... कंपनी के ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत उसे 6 महीने अमेरिका में गुज़ारने होंगे... आयशा ने जब पर्स से अपना फोन निकाला तो देखा... रोहित के 10 मिस्ड कॉल पड़े हुए थे... कम से कम 15 एसएमएस थे... फौरन उसे फोन किया... 

उधर से आवाज़ आयी.. अरे कहां हो यार... कब से फोन कर रहा हूं... मैसेज किए.. कोई जवाब नहीं... सबकुछ ठीक है ना... 

हां सर सबकुछ ठीक है... आपकी आवाज़ बहुत कम आ रही है.. शोर बहुत ज्यादा हो रहा है... 

हां यार.. बारात निकल चुकी है... इसीलिए शोर हो रहा है... तुम बताओ... कैसा रहा तुम्हारा इंटरव्यू... जॉब मिली... 

हां सर.. मिल गयी... वहीं तो थी.. इसीलिए आपका फोन उठा नहीं पायी.. और ना ही मैसेज का जवाब देने का ही वक्त मिला... अभी जैसे ही बाहर आयी हूं.. आपको फोन किया... 

अरे... बधाईयां... अब तो मैडम आईबीएम की एंप्लॉयी हो गयीं... बहुत अच्छा.. इसकी भी पार्टी ड्यू रही तुमपर... वापस आता हूं तो पार्टियां लूंगा तुमसे... चलो बारात निकल चुकी है... फिर फोन करूंगा... बाय-बाय.. एंड अगेन कांग्रेच्युलेशन्स... 

थैंक्यू सर... बाय-बाय... इतना कहकर आयशा ने फोन काट दिया.. वो समझ नहीं पा रही थी... कि इतनी अच्छी नौकरी मिलने की खुशी मनाए.. या फिर रोहित की शादी का गम... मन ही मन उसने सोचा.. यार ऐसा क्या है रोहित में.. जिससे वो सिर्फ तीन महीने में ही उसके ना सिर्फ इतना करीब हो गयी.. बल्कि पिछले ढाई साल से चल रहे अफेयर को भी उसने दरकिनार कर दिया... क्यों हो गया उसे रोहित से इतना प्यार... जिन बिहारियों के लिए वो गाली देती थी.. आज उन्हीं में से एक बिहारी से  उसे इतना प्यार कैसे हो सकता है... कुछ ही घंटे बाद उसकी शादी होने वाली है... और इधर उससे प्यार बढ़ता ही जा रहा है... क्या करूं यार.. कुछ समझ नहीं आ रहा.. इतना कहकर उसने ऑटो को हाथ दिया... और कहा.. .

भैया सेक्टर 12 चलना है... चलोगे... 

हां मैडम चलिए बैठिए... 

Saturday, July 04, 2015

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 5


कहानी का चौथा पार्ट यहां पढ़ें
अगली सुबह जब आयशा की नींद खुली तो उसने देखा रोहित दीवार से टेक लगाए.. अपने मोबाइल पर कुछ कर रहा था... जैसे ही उसने आयशा को देखा उसने कहा...

गुड मॉर्निंग...

गुड मॉर्निंग सर...

आय एम वेरी सॉरी आयशा...पता नहीं ये कैसे हो गया.. आय एम रिएली वेरी सॉरी यार... 

अरे प्लीज़ सॉरी मत बोलिए सर... इट्स ओके... ये बताइए ब्रेकफास्ट में क्या खिला रहे हैं... 

ओहहह... ब्रेड और चाय....

हां.. चलेगा-चलेगा...

फिर दोनों ने ब्रेकफास्ट किया... दोनों चुप थे.. दोनोें एक दूसरे से नज़रें चुरा रहे थे... चाय पीते-पीते रोहित ने कहा.. 

ऑफिस भी तो जाना होगा तुम्हें... 

हां जाना तो है.. लेकिन मन नहीं कर रहा... 

अच्छा अगर मन नहीं कर रहा तो मत जाओ... तुम्हारे एक दिन ना जाने से वहां कुछ बिगड़ने वाला थोड़े ही ना है... 

आप जा रहे हो ऑफिस... आयशा ने चेहरे पर सवालिया निशान बनाते हुए पूछा...

रोहित को ये सवाल थोड़ा अटपटा सा लगा... उसने कहा हां जाना तो पड़ेगा... तुम कहो तो ना जाऊं... 

मेरे कहने से आप ऑफिस नहीं जाओगे.. आयशा ने मुस्कुराते हुए रोहित की आंखों पर अपनी आंखे टिकाती हुई बोली... 

रोहित ने उसकी आंखों में ठीक वैसे ही झांकते हुए कहा.. हां.. बोल कर देखो नहीं जाऊंगा.. 

तो फिर मत जाओ.. इतना कहकर आयशा हंसने लगी... 

रोहित को पहले तो कुछ समझ नहीं आया.. लेकिन जब बात उसके भेजे में घुसी तो वो आयशा के और ज्यादा करीब खिसक गया...

उस दिन रोहित ऑफिस नहीं गया... आयशा ने भी अपने घर फोन करके बहाना मारा कि रात में जिस बर्थडे पार्टी में गयी थी वहां देर हो गयी.. इसलिए वो इधर से ही ऑफिस निकल रही है... शाम को घर आएगी... 

उस दिन ना तो आयशा ही घर से बाहर गयी.. और ना ही रोहित...सर्दियों के दिन थे इसलिए शाम जल्दी घिर आयी.. शाम 6 बजे के करीब रोहित ने आयशा को उसके घर ड्रॉप कर दिया... दोनों के बीच कुछ शुरु हो चुका था.. लेकिन क्या ये प्यार था... या कुछ और... दोनों में से किसी को कुछ भी नहीं पता था... लेकिन हां दोनों इस नए शुरु हुए रिश्ते की गर्माहट और संजीदगी समझ रहे थे... 

हाय रोहित सर... कैसे हैं आप... 

हाय आयशा.. मैं ठीक हूं... तुम बताओ... 

कुछ नहीं सर आज इंटर्नशिप का आखिरी दिन है... एक-दो जगहों पर सीवी डाली है.. कहीं ना कहीं हो ही जाएगा... छोटी मोटी कंपनी में तो मिल ही जाएगी  नौकरी... 

अच्छा... हां.. वो तो मिल ही जाएगी... चलो कैंटीन चलते हैं... चाय पीते हैं... वैसे भी चाय तो तुम्हें कुछ ज्यादा ही पसंद है... रोहित ने रहस्यमयी मुस्कुराहट देते हुए आयशा की ओर देखा... 

आयशा फौरन शर्मा गयी... और बोली हां चलिए... चाय पीते हैं.. वैसे भी आपके साथ ऑफिस में अब ये आखिरी चाय होगी... 

टेबल पर जैसे ही चाय आयी.. अचानक आयशा करीब-करीब उछलते हुए बोली.. 

अरे सर.. आपको तो बर्थडे आने वाला है... 

हां आने तो वाला है.. 

तो आपका बर्थडे कल सेलीब्रेट करते हैं... कल मैं कुछ काम से ऑफिस आउंगी.. उसके बाद आपके साथ ही चलेंगे... काजल और दिव्या को भी बोल देती हूं... आपको ट्रीट देनी पड़ेगी.. क्योंकि अब तो आप बर्थडे अपनी बीवी के साथ मनाओगे... हफ्ते भर में आपकी शादी हो जानी है... 

रोहित ने कहा ठीक है... कल का डन करते हैं फिर... 

अगले दिन आयशा... काजल और दिव्या ने मिलकर रोहित का बर्थडे मनाया... बर्थडे के अगले ही दिन रोहित को घर निकलना था.. आखिर शादी जो थी उसकी...आयशा बेहद खुश नज़र आ रही थी.. लेकिन असल में वो थी नहीं... वो रोना चाहती थी... वो जानती थी.. कि जिस रास्ते वो बढ़ चुकी है.. उस पर उसकी मंज़िल नहीं आएगी... वो कुछ भी कर ले.. लेकिन वो रोहित को नहीं पा सकती... रोहित भी उपर से खुश तो था.. लेकिन मन ही मन उसे भी इस बात का अहसास था.. कि आयशा से दूर होना उसके लिए अब मुश्किल होने वाला है... कुछ तो है कनेक्शन है दोनों के बीच... जिससे वो एक-दूसरे से जुड़ गए हैं...

कहानी का छठा पार्ट यहां पढ़ें

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 4


कहानी का तीसरा पार्ट यहां पढ़ें
आयशा का रोहति के लिए यूं सोचना एक महीने में ही काफी आगे बढ़ गया... उसे पता था कि रोहित की शादी होने वाली है... लेकिन पता नहीं क्यों बातचीत बढ़ने लगी... दिनभर में 100-100 मैसेज भेजे जाने लगे... फिर फोन पर बातें भी होने लगीं... ना तो रोहित को अंदाज़ा लग रहा था कि दोनों किस ओर जा रहे हैं.. और ना ही आयशा को... रोहित को पता था कि कुछ ही महीनों बाद उसकी शादी है.. उधर आयशा भी साक्षम के साथ शादी करने और आगे की ज़िंदगी प्लान कर चुकी थी.. लेकिन दोनों की ज़िंदगी में पता नहीं क्या कनेक्शन हुआ.. कि दोनों करीब आ गए... 

हैलो.. रोहित सर.. 

हां जी... क्या कर रही हैं आप... 

अरे सर.. ये आप ना मुझे आप ना बोला करो... 

क्यों भई... आप बोलने में क्या परेशानी है... 

अरे सर जब भी आप मुझे आप  बोलते हो ना... मेरे दिल में कुछ-कुछ होने लगता है... 

कुछ-कुछ होने लगता है.. क्या होने लगता है.. 

अरे रहने दो आप.. आप नहीं समझोगे... 

अच्छा सुनो ना... आज मिलोगे मुझसे... शाम को... आपकी तो छुट्टी है ना आज.. 

हां मिल लेते हैं... डिनर भी कर लेना मेरे साथ... 

यार बाहर नहीं जाना कहीं... घर पर ही आती हूं मैं...

अच्छा.. ठीक है...आ जाओ... मैं घर पर ही हूं... 

करीब शाम के छह बजे रोहित के घर की बेल बजती है... रोहित समझ जाता है.. कि आयशा आ गयी... वो दरवाज़ा खोलता है... 

हे.. हाय... आ जाओ अंदर...

हैलो रोहित सर... कैसे हैं आप... ट्रैफिक में फंस गयी थी.. इसलिए थोड़ी देर हो गयी... 

अरे कोई नहीं.. आ जाओ... बैठो... 

सर एक बात पूछू... 

हां-हां... पूछो.. क्या हुआ... 

मे आई हग यू...

हा हा हा हा... अरे ऐसा क्या हो गया... ओके... ठीक है... यू कैन हग मी... रोहित ने हंसते हुए अपने कदम आयशा की ओर बढ़ा दिए... 

आयशा ने उसे बेहद ज़ोर से हग किया... थोड़ी देर वैसे ही रही... और फिर अलग होकर सोफे पर बैठ गयी... 

रोहित ने पूछा... अरे बताओ भी क्या हुआ... 

अरे कुछ नहीं सर.. ऐसे ही बड़ा मन हो रहा था आपको हग करने का... 

अच्छा... 

अरे छोड़ो ना.. ये बताओ... शादी कब है आपकी... 

शादी है 18 जुलाई को.. और उससे तीन दिन पहले यानि 15 को तिलक है... 

तो आप घर कब निकल रहे हो... 

यार घर में 12 को जा रहा हूं... 

ओके... खाने में क्या खिलाओगे मुझे आज.... 

बताओ.. बाहर से मंगा लें खाना... 

नहीं-नहीं घर पर ही कुछ बनाते हैं.. 

यार मैं तो तहरी बेहद शानदार बनाता हूं... 

तो ठीक है.. आप तहरी बना लो... वही खा लेंगे... लेकिन पहले मुझे अच्छी सी चाय पिला दो... 

ठीक है.. पहले चाय ही पीते हैं... बस पांच मिनट वेट करो... 

थोड़ी देर बाद रोहित चाय लेकर आता है... और फिर दोनों चाय पीने लगते हैं... तभी आयशा कहती है... 

सर सुनो... आज ना मैंने बहाना मारा था... कि किसी दोस्त का बर्थडे है तो... घर देर से आऊंगी या फिर ज्यादा देर हुई तो... वहीं रुक जाऊंगी... लेकिन दिक्कत ये हो गयी है... कि जिसके यहां जाना था वो कहीं और चली गयी.. और अब मैं घर पर वापस भी नहीं जा सकती... बताओ क्या करूं...

अरे तो इसमें क्या है.. यहां पर रुक जाओ... 

पक्का.. आपको कोई प्रॉबल्म तो नहीं... 

हा हा हा हा हा अरे प्रॉबल्म नहीं होगी... दूसरा कमरा है... वहां तुम सो जाना.. मैं अपने कमरे में सो जाऊंगा... 

चलो ठीक है... थैंक्यू सो मच... 

रात में डिनर के वक्त आयशा ने रोहित की तारीफ करते हुए कहा.. 

क्या बात है सर... खाना बनाने में तो उस्ताद हो आप... शानदार तहरी बनायी है आपनी... 

हां यार... खाना बनाने का शौक है मुझे.. जब मैं हैदराबाद में था तब भी घर पर ही खाना बनाता था.. यहां भी खुद ही बनाता हूं... 

सही है सर... आपकी बीवी बेहद खुश रहेगी... 

क्यों भाई... 

खाना जो बनाना आता है आपको.. बिल्कुल घरेलू बंदे हो आप... मुझे पूरा भरोसा है.. अपनी बीवी का खूब ख्याल रखोगे...

हा हा हा हा... अबे शादी होगी तो... ख्याल रखना पड़ेगा ना.. अब एक लड़की अपना घर-बार.. मां-बाप सबकुछ छोड़कर मेरे पास आएगी... वो भी ज़िंदगी भर के लिए तो उसका ख्याल तो रखना बनता है ना.. 

हां सर.. ये बात तो है... 

डिनर के बाद भी दोनों की बातें होती रहीं... शादी के बारे में... आने वाली ज़िंदगी की प्लानिंग के बारे में... यहां तक की बच्चों के बारे में... उसके बाद कुछ देर तक खामोशी छायी रही... एकाएक आयशा बोली...

रोहित सर... मुझे आपको किस करना है... 

क्या....

मुझे आपको किस करना है... 

अरे क्या हो गया है तुम्हें... सब ठीक है ना... 

हां सर सब ठीक है... इतना कहकर आयशा आगे बढ़ी... और उसने रोहित को अपनी बांहों में पकड़ा... और फिर दोनों को ही याद नहीं रहा कि... कब तक उनके होठ.. एक-दूसरे को किस करते रहे... 

सुनो... मुझे नींद आ रही है... आयशा ने कहा... 

तो ठीक है चलो सोने.... 

दूसरे कमरे में या आपके कमरे में... 

जवाब में रोहित ने कुछ नहीं बोला... उसने आयशा को गोद में उठाया और अपने बेडरूम की ओर बढ़ गया... 

कहानी का पांचवां पार्ट यहां पढ़ें

Friday, July 03, 2015

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 3


कहानी का दूसरा पार्ट यहां पढ़ें
यार मम्मी तुम्हे पता है... अक्षित भैया के जिन दोस्त ने मुझे इंटर्नशिप करायी अपनी कंपनी में... वो बिहारी हैं... 

अरे बिहारी हैं तो क्या हुआ... सारे बिहारी एक जैसे नहीं होते.. और ये क्या लगा रखा है.. बिहारी..बिहारी... हमारे यूपी में भी तो एक से एक घटिया लोग होते हैं... 

ओह हो मम्मी तुम नहीं समझोगी... ये बिहारी ना.. बस बिहारी होते हैं... वैसे रोहित सर देखने से ठीक ठाक ही लग रहे हैं.. वो जो रूचि मैम हैं ना जिनके साथ मुझे रखा गया है... वो बता रही थी.. कि वैसे तो रोहित सर इंटेलीजेंट हैं... लेकिन हैं थोड़े गुस्से वाले... मुझे तो डर ही लगा रहता है... हमारे डिपार्टमेंट की ओर आते हैं तो छुप जाती हूं.. पता नहीं कब किस बात पर डांट दें... 

ओह हो... तू भी पता नहीं क्या-क्या सोचती रहती है... अब जा... सो जा.. सुबह जाना है कि नहीं ऑफिस... टाइम पर नहीं पहुंची तो ऑफिसवाले कहेंगे.. देखो महारानी के ठाट हैं... जुगाड़ लगा के आयी हैं तो आने जाने का वक्त भी अपनी सहूलियत के हिसाब से होगा... 

हां ठीक है जा रही हूं.. लेक्चर मत दो मम्मी अब इस वक्त मुझे... झुंझलाते हुए आयशा सीढ़ियों पर जाने लगी... अपने कमरे में पहुंची तो देखा उसका छोटा कंप्यूटर पर लगा हुआ है... 

ओए बंद कर ये... सोने का टाइम हो रहा है... सुबह ऑफिस जाना है मुझे.. मम्मी ने अलग से लेक्चर दे दिया है.. और तू है कि कंप्यूटर पर लगा हुआ है..

अरे यार तो सो जाओ ना... मेरे पीछे क्यों पड़ी हो... साक्षम से तो घंटों फोन पर बात करती हो तब कोई बात नहीं... मैं ज़रा सा कंप्यूटर पर क्या बैठ गया.. मैडम हुकुम चलाने लगीं... 

देख अगर तूने अभी के अभी कंप्यूटर बंद नहीं किया तो मम्मी को बुला दूंगा.. फिर समझ लियो तू... 

अच्छा ठीक है यार.. बंद कर रहा हूं... 

बेटर... अपने भाई से झगड़ कर आयशा सीधे अपने बेड पर जा गिरी... क्या यार आजकल तो साक्षम से भी ठीक से बात नहीं हो पाती.. टाइम ही नहीं मिलता... क्या मुसीबत है यार... तभी उसे रोहित का ख्याल आ गया... वैसे हैं तो रोहित सर बिहारी ही... देखने से ही घमंडी लगते हैं... ऑफिस में भी ज्यादा किसी से बात नहीं करते... पता नहीं किस बात का घमंड है... देखती हूं.. इन्हें भी... इतना सोचते-सोचते आयशा को नींद आ गयी... 

अरे बाप रे... फिर देर हो गयी.. रूचि मैम तो मार ही डालेंगी... मम्मी जल्दी से ब्रेकफास्ट पैक कर दो यार... मैं रास्ते में ही खा लूंगी... 

आयशा तू ऐसा करेगी तो जल्दी ही हॉस्पिटल पहुंचने वाली है... 

क्या मम्मी कभी तो कुछ ठीक बोल दिया करो... मैं जा रही हूं.. बाय... इतना बोल कर आयशा घर से भाग ली... ऑफिस पहुंची तो सामने से रोहित आता हुआ दिख गया... 

हैलो रोहित सर... 

हैलो आयशा.. कैसी हो.. क्या चल रहा है... कुछ सीखा अभी तक या नहीं.. या सिर्फ मस्ती ही हो रही है... 

अरे नहीं सर... रूचि मैम से सीख रही हूं... 

गुड... सीख लो जल्दी...अभी तो इंटर्नशिप है... बाद में कहीं जॉब लग गयी तो चार गुनी मेहनत करनी पड़ेगी... 

जी सर बिल्कुल...

अरे रोहित... मेरे इंटर्न से क्या पूछताछ हो रही है... रूचि ने अपना बैग डेस्क पर रखते हुए पूछा.. 

नहीं भाई.. यूं ही हाल चाल पूछ रहा था... चलो भाई मैं ज़रा बॉस के पास जा रहा हूं... काफी देर से बुला रहे हैं... पता नहीं क्या पूछने वाले हैं.. 

रोहित के जाने के बाद रूचि ने आयशा से पूछा... क्या पूछ रहा था.. 

अरे कुछ नहीं मैम.. यही कि क्या सीखा... जल्दी जल्दी सीखो.. वरना जॉब में मुश्किल आएगी.. चार गुना काम करना पड़ेगा.. 

हा हा हा.. अरे लेक्चर देने में माहिर है ये... कुछ भी बात कर लो... सबका ज्ञान है इसके पास... क्रिकेट हो... साइंस हो... लफ्फाज़ी हो.. कुछ भी छेड़ दो.. हर बात पर इसके पास कुछ ना कुछ है कहने को... 

हां मैम... बिहारी जो ठहरे... हर जगह टांग अड़ाएंगे ही... 

ओए.. ऐसा नहीं कहते... बहुत इंटेलीजेंट है रोहित... बकवास बातें बिल्कुल नहीं करता.. और तुझसे तो थोड़ी सी बात भी कर ली.. ऑफिस की लड़कियों से तो हाय-हैलो तक नहीं करता... चल ज़रा ये थोड़ा सा काम पड़ा है.. इसे निपटाते हैं.. 

ओके मैम... इतना कहकर आयशा अपनी डेस्क की ओर मुड़ गयी.. और सोचने लगी.. भइया यानि इन बिहारी बाबू में इगो खूब है... ठीक है... हम भी कम नहीं हैं... देखते हैं... 

लंच टाइम पर कैंटीन में आयशा जब पहुंची तो देखा रोहित और रूचि खाना खा रहे हैं.. सो वो भी उसी टेबल पर बैठ गयी... बातों ही बातों में आयशा ने रोहित से पूछा सर आपकी शादी हो गयी... 

शादी.. क्यों... 

नहीं वैसे ही पूछा... सोच रही थी... अगर आप शादी शुदा हुए तो आपकी पत्नी आपको कैसे झेलती होंगी... आप तो ऑफिस में बिल्कुल चुपचाप बैठे रहते हैं.. ऐसा लगता है मानो कंप्यूटर सिर्फ आपके लिए ही बना हो... आस-पास से गुज़र भी जाओ तो आपको पता ही नहीं लगता... 

हा हा हा.. नहीं ऐसी बात नहीं है... ऐसे ही काम करने की आदत है मुझे... और हां.. फिलहाल तो शादी शुदा नहीं हूं... लेकिन जल्दी ही होने वाली है... दिसंबर में शादी हो जाएगी मेरी... 

सच में.. आप मज़ाक तो नहीं कर रहे... कांग्रेट्स सर... 

अरे रोहित मज़ाक कम करता है.. और कम से कम शादी के मामले में तो नहीं ही करेगा.. क्यों है ना रोहित.. 

हा हा हा हा हा.. हां भाई सच में मेरी शादी होने वाली है... थैंक्यू सो मच... 

अच्छा तो बच्चू अब फंसने वाले हैं... वैसे लगते खड़ूस हैं.. लेकिन हैं नहीं... नेचर तो अच्छा लग रहा है... ऑफिस के भीतर कुछ और लगते हैं... और यहां लंच टेबल पर कुछ अलग ही नज़र आ रहे हैं... हो सकता है प्रोफेशनली मजबूरी हो ऐसे रहने की... मन ही मन आयशा रोहित से थोड़ी इंप्रेस हो गयी... अब रोहित के देखते वक्त उसे बिहारी याद नहीं आता था.. अब वो समझ गयी थी.. कि सारे बिहारी एक जैसे नहीं होते... मुस्कुराते हुए उस अपना खाना खत्म किया और फिर लंच बॉक्स लेकर अपनी डेस्क की ओर बढ़ चली... 

रात में जब आयशा सोने पहुंची तो उसे रोहित सर का चेहरा नज़र आ रहा था... वो समझने की कोशिश कर रही थी.. कि ऑफिस के भीतर के रोहित में और आज जो लंच टेबल पर रोहित नज़र आया.. उसमें क्या फर्क था... और क्यों वो रोहित के बारे में इतना सोचने लगी है... 

वो इंटरव्यू वाली लड़की पार्ट - 2

कहानी का पहला पार्ट यहां पढ़ें
कहानी के पहले पार्ट में आपने पढ़ा कि किस तरह अभी-अभी कॉलेज से निकली आयशा शर्मा को इंटर्नशिप चाहिए थी... कई जगहों पर उसने कोशिश की लेकिन उसकी इंटर्नशिप हुई नहीं.. आखिरकार उसने अपने चचेरे भाई से कुछ करने को कहा तो उसने इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स में अपने बेहद करीबी दोस्त रोहित राज से मिलने भेजा.. आयशा को वहां इंटर्नशिप मिल गयी... लेकिन जैसे-जैसे उस ऑफिस में वक्त बीतता गया.. वो अपने भाई के दोस्त रोहित जो कि वहां पर एक तरह से उसका सीनियर भी था.. उससे वो बेहद प्रभावित हो गयी... अब आगे... 

आयशा ब्रेकफास्ट तो कर ले... आयशा की मम्मी ने आवाज़ लगायी...

आ रही हूं मम्मी... दो मिनट में.. मीनाक्षी से  बात कर रही हूं... 

भगवान जाने क्या होगा इस लड़की का... आयशा... मीनाक्षी से बात कर रही है या फिर साक्षम से... ब्रेकफास्ट कर ले... साक्षम कहीं भागा नहीं जा रहा... बाद में भी बात कर सकती है ना.. वैसे भी मैं देख रही हूं... तेरी बातें उससे खूब हो रही हैं..

अरे मम्मी क्या है यार... नहीं कर रही साक्षम से बात... आयशा ने चिल्लाकर जवाब दिया.. और फिर फोन में फुसफुसा कर बोली... 

साक्षम यार..चल बाद में बात करती हूं.. मम्मी ना चिल्ला रही हैं... 

आयशा ने फोन काटा ही था कि दोबारा घंटी बजने लगी.. 

अरे यार अब कौन है... लैंड के नंबर से कौन फोन कर रहा है मुझे.. 

हैलो... 

हैलो.. क्या आप आयशा शर्मा बोल रही हैं... 

हां जी बोल रही हूं.. आप कौन..

जी मैं इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स के एचआर से बोल रही हूं.. आपने इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया था... आप कल सुबह 10 बजे... अपने डॉक्यूमेंट्स के साथ आ जाएं... आपकी इंटर्नशिप यहां मंज़ूर कर ली गयी है... 

थैंक्यू सो मच... ओके.. मैं कल सुबह 10 बजे आ जाऊंगी.. थैक्यू..थैंक्यू सो मच... 

मम्ममममी... मेरा काम हो गया... आयशा चिल्लाती हुई नीचे भागी...

अरे आराम से.. आराम से.. क्या हो गया.. क्यों पागल हुई पड़ी है.. साक्षम ने प्रोपोज तो नहीं कर दिया... 

अरे मम्मी... आप भी ना... ऐसी कोई बात नहीं है... मुझे इंटर्नशिप मिल गयी.. इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स में... अक्षित भैया का तो जवाब नहीं... एक बार उन्होंने अपने दोस्त से कहा और काम हो गया... कल सुबह 10 बजे जाना है मुझे.. अपने डॉक्यूमेंट्स के साथ... 

अरे वाह.. ये तो बहुत अच्छी खबर है... अक्षित को बता दे... 

हां अभी फोन करती हूं... 

पहले ब्रेकफास्ट तो कर ले... 

नहीं मम्मी पहले बता तो दूं... भइया को... थैंक्यू तो बोल दूं.. 

हैलो.. अक्षित भैया.. थैंक्यू सो मच... मुझे इंटर्नशिप मिल गयी...

अरे वाह... देख बोला था मैंने.. तेरा काम हो जाएगा... अरे रोहित मेरा बहुत अच्छा दोस्त है... चिंता मत कर.. जा वहां पर इंटर्नशिप कर... रोहित को बोल दूंगा.. तुझे कोई परेशानी नहीं होगी वहां पर... और हां रोहित से ज़रा ठीक से पेश आइयो...ये कॉलेज वाला तरीका अब वहां नहीं चलेगा... प्रोफेशनल जगह है... 

ठीक है भैया... आपके दोस्त को वहीं जाकर थैंक्यू बोलूंगी... वैसे दोस्ती सही है आपकी... आपके एक फोन पर काम हो गया.. और कहां मैं मारी-मारी फिर रही थी... 

हा हा हा हा... अच्छा चल ठीक है.. मुझे ऑफिस निकलना है... बाद में बात करता हूं.. 

ओके भैया बाय-बाय एंड अगेन थैंक्यू सो मच...बाय...

अगले दिन आयशा इंफोटेक सॉफ्टवेयर्स के दफ्तर सुबह 9:50 पर ही पहुंच गयी..एच आर में थोड़े बहुत कागज़ाती कार्रवाई के बाद उसे ऑफिस में भेज दिया गया... उससे कहा गया कि आप सॉफ्टवेयर टेस्टिंग डिपार्टमेंट में रूचि से मिल लें... और उनके साथ मिलकर ही काम देखें और सीखें... 

हैलो मैम.. आप का ही नाम रूचि है.. 

हैलो.. हां मैं ही रूचि हूं... 

अच्छा-अच्छा.. आ जाओ.. रोहित ने बताया था तुम्हारे बारे में... चलो आज तो तुम्हारा पहला दिन है.. ऑफिस में घूमो फिरो... और जो कुछ भी जानना हो.. समझना हो तो मुझसे पूछो... धीरे-धीरे तुम्हें काम समझा दूंगी कि इंटर्नशिप के दौरान तुम्हें करना क्या होगा... 

ओक मैम... ठीक है... मैम एक बात पूछूं.. 

हां-हां पूछो... 

ये रोहित राज सर भी टेस्टिंग में ही हैं क्या... 

नहीं-नहीं रोहित तो सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलेपर है... उसकी टीम को ही हमें सपोर्ट करना होता है... 

ओके.. मैम.. थैंक्यू... एक्चुएली मुझे उनसे मिलना था और थैंक्यू बोलना था... 

अच्छा.. ठीक है.. यहां से सीधे चली जाओ... फर्स्ट राइट... वहीं तुम्हें कहीं वो सिस्टम में सिर घुसाए... चश्मा चढ़ाए... रोहित मिल जाएगा... 

ठीक है मैम.. मैं ज़रा उनसे मिल कर आती हूं... 

आयशा जैसे ही वहां पहुंची तो देखती है कि... सच में चश्मा पहने.. रोहित सर बिल्कुल कंप्यूटर में घुसे जा रहे थे... थोड़ी देर वो पीछे खड़ी रही... सोचती रही कि क्या करूं... पता नहीं रोहित सर अगर कोई ज़रूरी काम कर रहे हों.. और मेरी आवाज़ सुनकर नाराज़ हो गए तो क्या होगा.. वैसे चेहरे से भी गुस्सैल नज़र आते हैं... और थोड़े खड़ूस भी... लेकिन कपड़े  पहनने के ढंग से तो इतने सीनियर लग नहीं रहे हैं... मस्त जींस और टीशर्ट डाल रखी है... और उम्र भी उतनी नहीं लग रही जितनी मैं सोच रही थी.. 

हैलो सर... 

ओ हो... आयशा शर्मा.. आ गयीं आप...वेलकम-वेलकम... कोई दिक्कत तो नहीं हुई... 

नो सर... टेस्टिंग डिपार्टमेंट में भेजा गया है मुझे रूचि मैम के पास... 

अच्छा.. तब तो मज़े हैं तुम्हारे... डिपार्टमेंट ही वो आराम का है.. हा हा हा हा काम ही नहीं होता कुछ... 

हैं सर..ऐसा है.. फिर क्यों डाला मुझे उसमें... 

अरे नहीं-नहीं मज़ाक कर रहा हूं... अगर काम नहीं होता तो डिपार्टमेंट बनाते ही क्यों.. चलो मैंने रूचि को बोल दिया है... तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी.. 

ठीक है सर.. थैंक्यू सो मच सर.. कि आपने मेरी हेल्प की.. 

अरे तुम मेरे बेहद करीबी दोस्त की बहन हो... हेल्प तो करनी ही थी.. आखिर हमें भी यहीं रहना है... दोस्त की मदद नहीं करूंगा तो किसकी करूंगा... 

ओके सर.. अगेन थैंक्यू सो मच... 

ओके.. 

आयशा वापस अपने डिपार्टमेंट की ओर मुड़ गयी...और सोचने लगी.. रोहित सर उतने खड़ूस हैं नहीं जितने दिखते हैं... कम से कम पहली इस बार वाली मुलाकात तो ठीक ही रही...

मिल आयी तुम रोहित से... 

हां मैम... 

क्या कहा उसने... कहीं ऐसा तो नहीं कहा कि इस डिपार्टमेंट में कोई काम धाम तो है नहीं.. 

हां मैम.. बिल्कुल यही कहा... आपको कैसे पता... सर ने इतनी जल्दी फोन करके बता भी दिया क्या..

हा हा हा हा.. अरे नहीं-नहीं.. वो मेरे डिपार्टमेंट के बारे में ऐसा ही कहता रहता है... सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत अच्छा है उसका...सिर्फ दिखने से ही खड़ूस दिखता है.. दिल से बेहद अच्छा है... बेहद हेल्पिंग नेचर वाला बंदा है...वैसे है तो बिहारी... लेकिन बिहारियों वाले एक भी गुण नहीं हैं उसमें... 

क्या वो रोहित सर बिहारी हैं...

हां.. क्यों तुम्हें पता नहीं चला...

नहीं मैम...उनके बोलने से तो बिल्कुल भी नहीं लगता कि वो बिहार से हैं... और मुझे तो बिहारियों से दूर रहना ही पसंद हैं...

हा हा हा हा.. सबको ऐसा ही लगता है...लेकिन रोहित वैसा  है नहीं... बिहारियों के बारे में तुम्हारे ख्यालात बदलने वाले हैं मैडम.. हां एक बात और बता दूं... अभी तो हंस के बात कर रहा था.. लेकिन उसके गुस्से से बचकर रहना... एक बार जब उसे गुस्सा आ गया तो समझ लो... हमारे सुपर बॉस भी उससे बच कर निकल जाते हैं... 

हा हा हा हा ओके ठीक है मैम... 

अब आयशा के दिमाग में बहुत कुछ चलने लगा...यार ये तो सही है... बिहारियों से मुझे चिढ़ होती थी.. बिहारियों के लिए गाली देती थी.. और काम भी आया तो कौन.. एक बिहारी... सही है बेटा... रोहित राज... अरे यार नाम भी तो बिहारियों वाला है.. मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था.... कितनी डंब हूं मैं... वैसे एक बात तो है... अबतक तो बिहारियों वाले एक भी गुण रोहित सर में दिखे नहीं हैं... लेकिन क्या वाकई वो इतने गुस्सैल हैं.. कि बॉस को भी बच कर निकलना पड़े... चलो देखते हैं... इन रोहित राज सर को... हैं क्या चीज़ ये...