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Monday, June 08, 2015

बिहार में अब कौन सा राज वापस आएगा ? सुशासन राज या जंगल राज ?


बिहार की जनता ने लालू राज से छुटकारा पाने के लिए बदलाव किया... बीजेपी और जेडीयू एक साथ चुनाव लड़े... जीते भी... सरकार चल भी ठीक रही थी... विकास की बयार भी बही... जिन सड़कों को मैंने अपने होश में (फिलहाल 35 साल का होने वाला हूं) सड़कों की तरह नहीं देखा था.. बस उसमें गड्ढे नज़र आते थे.. आधे घंटे का रास्ता तय करने में उस वक्त हमें करीब 2-3 घंटे लग जाते थे... उन्हें मैंने शानदार होते देखा.. मेरे गांव से होकर गुज़रने वाली सड़क भी सफेद पट्टियों के साथ चकचका गयीं... बिजली के जिन खंभों पर लगे एल्युमिनियम के तारों को मैंने किलो के भाव बिकते देखा था... उनमें बिजली दौड़ती हुई देखी... दरअसल जब आप बिल्कुल फकीरी हालात में हो और आपकी आधारभूत ज़रूरतें भी जब पूरी हो जाती हैं तो लगता है कि भइया गज़बे काम और विकास हुआ है... लेकिन विकास तब पूरा माना जाता जब बिहार के युवाओं को दूसरे राज्यों में कमाने ना जाना पड़ता... हालांकि हमारे वक्त में और अब के वक्त में बदलाव बहुत हुए हैं... इस वक्त माइग्रेशन कम हुआ है... बिहार के युवा अब अपने इलाके में कुछ ना कुछ कर रहे हैं... लेकिन अब एक बार फिर बिहार की राजनीति बदलाव के दौर से गुज़र रही है... नीतीश कुमार और लालू यादव एक हो गए हैं... लालू की मुश्किल ये है कि खिसकती जा रही ज़मीन बचाने के लिए उन्हें जेडीयू का सहारा लेना पड़ रहा है... नीतीश कुमार ये विलय चाहते नहीं थे क्योंकि विलय होते ही उन्हें अपने अस्तित्व को बनाए रखना बेहद मुश्किल हो जाएगा... शायद इसीलिए वो इस बात पर अड़े हुए थे कि मुख्यमंत्री का चेहरा तो वही होंगे.. चाहे इसलिए कुछ भी क्यों ना करना पड़े... बदलते हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच बिहार की जनता के लिए स्थिति बेहद अजीबोगरीब हो गयी है... वोट किसे दें और क्यों दें के बीच हो फंस गयी है... जातिगत राजनीति भी बिहार में एक बड़ी दखल रखती है... इसलिए समीकरण और ज्यादा फंसे हुए नज़र आने लगे हैं... दरअसल जनता के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये है कि जिन लालू राज के खात्मे के लिए उसने जिसे वोट किया... अब वही लालू के साथ खड़ा है... हालांकि कहा यही जाता है कि राजनीति में कुछ भी हो सकता है... दुश्मन भी दोस्त बन सकते हैं... और दोस्त भी दुश्मनी कर सकते हैं.. जैसा कि जम्मू-कश्मीर और महाराष्ट्र में हुआ... लेकिन बिहार की राजनीति और बिहार की जनता दोनों ही लीक से हटकर चलने के लिए मश्हूर है... इसलिए इस बार वो लीक क्या होगी... देखना मज़ेदार होगा.. वैसे ये भी बड़ा मज़ेदार है कि बिहार में सीएम का चेहरा कौन होगा.. इसका फैसला पड़ोसी राज्य की पार्टी के एक मुखिया कर रहे हैं...