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Sunday, May 31, 2015

अडानी ने दी जीशान को नौकरी


जीशान खान का नाम आप लोग अभी भूले नहीं होंगे... जीशान को मज़हब के नाम पर एक कंपनी में नौकरी नहीं दी गयी... यानि जीशान को उनकी काबलियत के बाद भी इसलिए नौकरी पर नहीं रखा गया क्योंकि वो मुस्लिम हैं... सोशल मीडिया पर... न्यूज़ चैनल्स पर... अखबारों में लंबी बहस चली.. मुस्लिम समुदाय के अलग दावे... हिंदू समुदाय के अलग दावे... लेकिन इन सबके बीच अच्छी खबर ये आयी है कि जीशान को अब नौकरी मिल गयी है.. जब ये सारा बवाल चला तो जीशान के पास दर्जन भर से ज्यादा नौकरियों के ऑफर्स आए.. लेकिन उन्होंने अहमदाबाद से आए एक ऑफर को स्वीकार किया.. ऑफर था अदानी ग्रुप से... अदानी के मुंबई ऑफिस में जीशान ने बतौर एग्ज़िक्युटिव ट्रेनी ज्वाइन कर लिया है... 

अब इस सारे प्रकरण के बाद मुझे लगता है कि एक वर्ग इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार देगा.. तो दूसरा वर्ग नौकरी मिल गयी है फिर भी इसे नेगेटिव नज़रों से देखेगा... यानि कुल मिलाकर चैन किसी को भी नहीं मिलने वाला... एक बोलेगा ये तो हमारा हक है.. अल्पसंख्यक हैं नौकरी देनी तो उसकी मजबूरी थी.. ऐसे कैसे नहीं देता.. वो ये नहीं कहेगा कि नौकरी मिल गयी है.. तो अदानी ग्रुप बधाई का पात्र है... क्योंकि उसका जुड़ाव एक खास पार्टी और एक खास नेता से है... दूसरा ग्रुप कहेगा.. हमारे समुदाय के साथ तो यही होता रहता है.. एकजुट रहेंगे नहीं.. राजनीति करेंगे.. एक ही समुदाय के होकर अपने ही लोगों को नीचा दिखाते हैं.. इसिलए तो बहुसंख्यक होकर भी जयचंदों की वजह से पीछे रह जाना पड़ जाता है...

लेकिन इन सबके बीच एक वर्ग ऐसा भी है.. जो ना तो इधर हैं.. ना ही उधर हैं.. उन्हें अपनी दाल रोटी चलानी है.. अपने परिवार का पेट पालना है.. वो भी बिना किसी लफड़े के... उनमें से मैं भी एक हूं.. यही कहूंगा.. जीशान को उसका हक मिला... हिंदुस्तान का नागरिक होने का हक.. संविधान का हक जो हम सबके बराबर होने की बात करता है... और जीशान जैसे उन हज़ारों नौजवानों का मनोबल भी बढ़ा जिन्हें इस तरह की खबरें सुनकर-देखकर टेंशन हो गयी थी..

नोट - कृप्या हिंदू-मुस्लिम ग्रुप वाले इस पोस्ट से दूर रहें... अच्छी खबर थी इसलिए पोस्ट की.. अपने मन की बात कही...