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Monday, March 30, 2015

सैलरी का महीनों नहीं आना और पत्रकार का मर जाना - 3

अमित पांडे के बड़े भाई से बात हुई... अमित की मौत टाइफायड से हुई.. गोरखपुर ले जाकर उन्होंने इलाज कराया लेकिन बीमारी तबतक काफी बढ़ चुकी थी.. और रिकवरी नहीं हो पायी... उन्होंने ये भी बताया कि सहारा में अमित के साथ जो लोग काम करते थे.. उन्होंने काफी मदद की.. लेकिन होनी को जो मंज़ूर था वही हुआ... सहारा प्रबंधन के बारे में उन्होंने कुछ भी नहीं बोला.. हां अमित के सीनियर्स और जूनियर्स की तारीफ की... अमित की शादी अभी नहीं हुई थी... घर में मां-बाप के अलावा तीन भाई हैं... अमित घर में सबसे छोटे थे... सहारा के कुछ लोगों से बात हुई.. उन्होंने ने भी यही कहा कि हो सकता है पैसों की कमी की वजह से अमित ने पहले इलाज में लापरवाही बरती... क्योंकि टाइफायड के लक्षण भी वायरल बुखार की तरह ही होते हैं... इसीलिए अमित उसे टालते रहे.. बाद में जब उनके घरवालों को पता चला तो इलाज कराने गोरखपुर ले तो गए लेकिन तबतक बीमारी काफी बढ़ चुकी थी.. वहां से लखनऊ भी गए... डॉक्टरों ने कोशिश तो की लेकिन वो अमित को बचा नहीं पाए... क्योंकि तबतक टाइफायड ने अमित के ज्यादातर अंगों को नाकाम कर दिया था... यानी हो सकता है कि अगर नौकरी ठीक चल रही होती... सैलरी टाइम पर आ रही होती तो... अमित अपनी बीमारी पर पर्दा डालने की कोशिश नहीं करते... उनके बड़े भाई को हमने मदद करने की बात भी कही.. तो उनका कहना था कि अब जब अमित ही नहीं रहा तो... किसके लिए मदद लें.... खैर इस घटना से हम सबको सबक लेना चाहिए... और ऐसी कोशिश करनी होगी कि आगे ऐसा किसी के साथ ना होने दें....

सैलरी का महीनों नहीं आना और पत्रकार का मर जाना - 2

सहारा के न्यूज चैनल 'समय' उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड में असिस्टेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत अमित पांडेय जिनकी असमय मौत ने सारे मीडियाकर्मियों को हिला दिया है.. उनके बारे में अगर आपके पास कोई जानकारी हो... उनके घर परिवार के बारे में खबर हो... किसी के पास उनके परिवार से कॉन्टैक्ट करने का कोई फोन नंबर हो तो ज़रूर बताएं... अभी तक जिन लोगों से मेरी बात हुई है.. उनके मुताबिक सहारा न्यूज के सैकड़ों लोगों की सैलरी पिछले कई महीनों से नहीं आयी है... अमित को टाइफाइड हो गया था... कुछ दिन दिल्ली में भी इलाज चला और बाद में लखनऊ में भी इलाज हुआ...कई लोगों का कहना है कि उनकी मौत भूख से नहीं हुई... लेकिन साथ ही ये भी कहना है कि अगर पैसे होते तो शायद इलाज ढंग से हो पाता... और शायद उनकी असमय मौत नहीं होती... आखिरी वक्त में मल्टीपल ऑर्गन्स का फेल होना ही मौत की वजह बना... अगर किसी के पास उनके परिवार से कॉन्टैक्ट का कोई ज़रिया हो तो ज़रूर बताएं... जितनी भी मदद हमारी पत्रकार बिरादरी से हो पाएगी.. वो हम उनके परिवार के लिए करने की कोशिश में हैं..

सैलरी का महीनों नहीं आना और पत्रकार का मर जाना - 1

बहुत ही दुखद खबर आयी है... सहारा के न्यूज चैनल 'समय' उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड में 35 साल के असिस्टेंट प्रोड्यूसर अमित पांडेय की मौत हो गयी है... सहारा में सैलरी कई महीनों से नहीं आ रही है... अमित को टाइफाइड हो गया था... पहले दिल्ली मे्ं कुछ दिन इलाज हुआ... और शायद जब जेब में महंगे इलाज के लिए पैसे नहीं बचे.. तो उन्हें लखनऊ ले जाया गया.. वहां भी इलाज चला.. लेकिन आखिर में मल्टीपल ऑर्गन फेल हो जाने से अमित की मौत हो गयी... शायद सैलरी आती रहती... और अकाउंट में पैसे होते तो.. इलाज बेहतर होता... और शायद अमित की जान बच जाती... ज्यादा दुख इस बात का है कि... मीडिया संस्थानों में काम करने वाले लोग...जो पूरी दुनिया के हक की आवाज़ बनने का ढोंग रचते हैं... वो अमित पांडेय की जान ना बचा पाए... सहारा की हालत फिलहाल क्या है ये किसी से छुपी नहीं है... लेकिन क्या पत्रकारों की जान इतनी सस्ती हो गयी है... क्या अपने चहेते पत्रकारों पर करोड़ों रूपए उड़ाने वाली सरकार अमित पांडेय जैसे छोटे पत्रकार की जान बचाने के लिए कुछ नहीं कर सकती थी... या फिर हमारे जैसे पत्रकार सिर्फ इसलिए इस पर बात करने से कतराते रहेंगे कि अपनी तो चल रही है.. दूसरों से हमें क्या मतलब... लानत है...