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Monday, July 14, 2014

शो मस्ट गो ऑन



भाई खाना खाने चल रहा है...

नहीं यार पांच बजे का शो है... भूख तो लग रही है... लेकिन नहीं यार.. गड़बड़ हो जाएगी.. तू चल मैं शो कराके आता हूं...

इतना कहकर सार्थक काम में लग गया... और अरिहंत लंच बॉक्स लेकर खाने चला गया... सार्थक और अरिहंत पिछले पांच साल से साथ ही काम कर रहे हैं... जब दोनों पत्रकारिता का कोर्स कर रहे थे...तब ना जाने क्या-क्या सपने देखे थे... ऐसा करेंगे.. वैसा करेंगे... शुरु-शुरु में तो उत्साह था इसलिए सब अच्छा लग रहा था... लेकिन वक्त जैसे-जैसे बीतता गया... मीडिया की चकाचौंध के पीछे का काला चेहरा भी सामने आने लगा... लेकिन तमाम परेशानियों के बावजूद भी दोनों मीडिया में टिके हुए थे... दोनों मेहनती थे... क्रिएटिव थे... इसिलए टीवी चैनल में काम चल रहा था... 

साढ़े पांच बजे सार्थक ने अरिहंत से कहा... भाई बड़ी तेज़ भूख लग रही है... चल मैगी खाते है फिर एक-एक सुट्टा मारेंगे... 

चल फिर जल्दी चलते हैं... 8 का मेरा शो है... लेकिन दस मिनट तो निकाल ही सकता हूं... काम बहुत ज्यादा है - अरिहंत ने कहा..

जल्दी से एक मैगी बना दो गुप्ता जी.. बड़ी तेज़ भूख लगी है...

अरे सार्थक भइया...खाना तो फुर्सत से खा लिया करो... पांच मिनट ज्यादा लग जाएंगे तो दुनिया पलट नहीं जाएगी - मैगी को गरम पानी में डालते हुए गुप्ता ने कहा...

अरे गुप्ता जी... क्या कहें... कुछ किस्मत का दोष है और कुछ अपना... सेटिंग गलत इलाके में हो गयी है... चलो एक छोटी गोल्ड दे दो... जबतक मैगी बनेगी तबतक सुट्टा मार कर वक्त तो बचा लूं...

यार अरिहंत.. तू ये बता कि ऑफिस में इतनी पॉलिटिक्स क्यों है यार... साला अपने भेजे में तो बात घुसती ही नहीं है... 

भाई घुसती तो अपने भेजे में भी नहीं है लेकिन क्या करें... सिस्टम से बाहर निकलने की कोशिश जितनी की जाती है... उतना ही सिस्टम आपको अपने अंदर समेटता जाता है... अब देख ना इनक्रीमेंट का वक्त बीत चुका है... जाने कब पैसे बढ़ेंगे.. परिवार बढ़ा तो खर्चे भी बढ़े लेकिन सैलरी वहीं की वहीं है...

सार्थक भइया इ लोग अपनी मैगी... चाय भी चढ़ा दूं क्या...

नहीं गुप्ता जी इतना वक्त नहीं है... चाय फिर आकर पीता हूं..

हां यार... इंक्रीमेंट का इंतज़ार तो है.. लेकिन जाने कब होगा... एक तो लोग कम हैं... काम भी इतना ज्यादा है... उपर से जब बारी इंक्रीमेंट की आती है तो कोई कुछ बोलता ही नहीं... अच्छा छोड़ यार तेरा तो कल ऑफ है... क्या करेगा... सार्थक ने उससे सुट्टा लेते हुए पूछा... 

कुछ नहीं यार... हफ्ते में एक तो ऑफ मिलता है... वो भी ऐसे गुज़र जाता है.. जैसे अहसान कर रहा हो... कई सारे काम है... निपटाना है... अनु के स्कूल भी तो जाना है... पहली टीचर-पैरेंट मीटिंग है... देखूं तो सही पहले साल में बिटिया का रिपोर्ट कार्ड क्या है...

फिर दोनों वापस आकर अपने-अपने काम में लग गए... रात करीब दस बजे दोनों ऑफिस से निकले और घर चले गए... छुट्टी के अगले दिन अरिहंत ऑफिस पहुंचा... हैलमेट डेस्क पर रखकर उसने इधर-उधर नज़र दौड़ाई सार्थक उसे कहीं नज़र नहीं आया... ऑफिस में सन्नाटा छाया हुआ था... सबके चेहरे लटके हुए थे... 

हद है यार.. ये सार्थक फोन क्यों नहीं उठा रहा... अबे नेगी.. सार्थक को देखा क्या तूने... 

हां भाई एचआर से फोन आया था.. वहीं गया है...

अबे इंक्रीमेंट के लेटर बंट रहे हैं क्या...

क्या बात कर रहे हो अरिहंत भाई... यहां तो निकालने वालों की लिस्ट निकली हुई है... एक-एक कर एचरआर वाले बुला रहे हैं और तुम इंक्रीमेंट की बात कर रहे हो...

अरिहंत की ज़बान को जैसे लकवा मार गया... वो सोचने लगा... दो महीने बाद तो सार्थक बाप बनने वाला है... अभी-अभी तो बाइक खरीदी थी उसने.. वो भी ईएमआई पर... और हां.. छोटे भाई को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी भी तो उसी पर है... 

Tuesday, April 08, 2014

Breaking News

Breaking News - दिल्ली पुलिस ने उस ऑटोवाले को इनाम दिया जिसने केजरीवाल को थप्पड़ मारा... कमिश्नर बस्सी साहब तो इतने खुश हो गए कि उन्होंने ऑटोवाले को आजीवन रेड लाइट जंप करने... सारे ट्रैफिक रुल्स तोड़ने की आजादी दे दी है... अपने पुलिसवालों को डांटते हुए कहा कि देखो मुझे खुश करने का जो काम सिपाही से लेकर डीसीपी..एसीपी तक नहीं कर पाए वो एक ऑटोवाला कर गया..

Friday, January 10, 2014

भ्रष्टाचार… तू महान है... ना कोई तेरे समान है...

- हैलो दिल्ली एंटी करप्शन हेल्पलाइन
- हां जी
- सर मैं राजेश बग्गा हूं, शकरपुर इलाके में रहता हूं
- क्या आपसे किसी सरकारी कर्मचारी ने रिश्वत मांगी है
- हां जी...हां जी..
-          जी मुझे ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना है... लेकिन मुझसे एक हज़ार रुपए की रिश्वत मांगी जा रही है
-          कौन मांग रहा है आपसे रिश्वत
-          जी वो लाइसेंस वाला बाबू
-          क्या नाम है उनका
-          जी रत्नेश कुमार
-          ठीक है, आप निश्चिंत रहिए, हम आपको बताएंगे कि क्या करना है
-          हां जी...हां जी... हां जी


-          हैलो... मैं एंटी करप्शन ब्यूरो से जगत सिंह बोल रहा हूं, रत्नेश कुमार जी से बात हो जाएगी
-          हां जी सर... बताइए सर... कोई सेवा है मौका दीजिए...
-          रत्नेश जी आपके खिलाफ शिकायत आयी है, आपने राजेश बग्गा जी से एक हज़ार रुपए रिश्वत मांगी है...
-          क्या बात कर रहे हैं सर...
-          जी हां रत्नेश जी... अब बताइए आपके खिलाफ कार्रवाई क्यों ना की जाए...
-          अरे सर... क्या बात करते हैं... आप भी बाल बच्चेदार आदमी हैं...
-          देखिए हमें इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता, सीएम साहब का ऑर्डर है, एक भी भ्रष्टाचारी को छोड़ना नहीं है
-          ठीक है सर फिर कार्रवाई कर दीजिए, लाइसेंस भी सीएम साहब आकर ही बनाएंगे क्योंकि बिना पैसे तो ये काम होता नहीं है
-          अच्छा वैसे एक दिन में कितने लाइसेंस बना लेते हैं आप
-          क्या बताएं सर.. धंधा ठीक रहा तो 10 बन ही जाते हैं
-          अच्छा यानी रोज़ का आपका करीब-करीब 10 हज़ार तो बन ही जाता है
-          अब आप कार्रवाई कर देंगे तो नहीं बनेगा
-          चलिए ठीक है रोज़ के पांच मेरे पांच आपके
-          क्या बात कर रहे हैं सर
-          हां जी..बिल्कुल सही सुना आपने.. आखिर हम भी तो बाल बच्चेदार आदमी हैं
-          हैलो.. राजेश बग्गा जी, मैं एंटी करप्शन डिपार्टमेंट से बोल रहा हूं
-          जी सर....
-          अरे भइ ऐसे झूठे आरोप लगाएंगे तो काम कैसे चलेगा... हमने जांच कर ली है... रत्नेश कुमार जी तो निहायत ही ईमानदार आदमी हैं... कहीं आपकी कोई पुरानी दुश्मनी तो नहीं है उनसे..
-          सर...सर...सर.. नहीं सर.. ऐसी कोई बात नहीं है... सर वो सच्ची में मुझसे रिश्वत मांग रहा था..
-          अब आप मुझे झूठा करार दे रहे हैं... पूरे डिपार्टमेंट ने जांच कर ली... वो शरीफ और ईमानदार आदमी हैं...आपके खिलाफ अब कार्रवाई होगी.. सीएम साहब ने पहले ही कहा था कि फर्जी कॉल किया तो खैर नहीं...
-          अरे साहब मैं आम आदमी हूं... उसने रिश्वत मांगी थी सर... सर प्लीज़ मुझे छोड़ दीजीए.. मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं...
-          तो ऐसा करिए... लिफाफे में 1 हज़ार रुपए रखकर करोलबाग मेट्रो स्टेशन के पास वाले भिखारी को दे आइए... भिखारी का भला भी हो जाएगा.. और आप पर मैं कार्रवाई भी नहीं करूंगा.. क्योंकि आपने एक भले का काम कर दिया है.. और वैसे भी धर्म का काम करने वालों के खिलाफ मैं कुछ करता नहीं
-          हां जी सर.. हां जी सर.. कर दूंगा सर.. पक्का सर..


-          अबे कितने का कलेक्शन हुआ बे
-          मालिक आज तो धंधा मंदा है... 15 हज़ार का ही हुआ है...
-          अच्छा चल 14 हज़ार इधर दे.. और तू अपना एक हज़ार रख ले...
-          जी मालिक.. आपकी दया मालिक
-          और कोई तुझे परेशान तो नहीं कर रहा था... अगर करे तो बोल दियो... एंटी करप्शन वाले जगत जी की जगह है...
-          जी मालिक... बिल्कुल मालिक


अब सवाल ये है कि भ्रष्टाचार को खत्म कैसे किया जाए... लूप होल्स तो हर जगह मिल सकते हैं... ये तो बस एक उदाहरण है... ऐसे तो हज़ारों रास्ते भ्रष्टाचारी निकाल लेते हैं... तब क्या मुख्यमंत्री जी खुद जांच करेंगे... ज़रूरत हम सभी को जागने की है... कसम खाइए.. रिश्वत ना देने की... और रिश्वत मांगने वाले शख्स के खिलाफ आवाज़ उठाने की...