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Tuesday, November 30, 2010

TRP और टेंशन


दिन में टेंशन
रात में टेंशन
जागते हुए टेंशन
सोते हुए टेंशन

क्या बनाउं..
क्या दिखाउं...
क्या करूं
की टीआरपी आए...

टीआरीपी पागल बना देगी
टीआरपी बुड्ढा बना देगी
टीआरीपी दिमाग का दिवाला
निकाल देगी

टीवी का कौन सा दैत्य निकालूं
टीवी पर कौन सा विनाश फैलाउं
टीवी पर लोगों को कैसे डराउं


अब हर बुधवार खुद डरता हूं
टीआरीपी के टेंशन में रहता हूं
सर मेरा शो उपर..
सर उसका शो नीचे..
यही सुनता रहता हूं...


क्या करें इस टीआरपी का
क्या करें इस टीवी का
ये सुरसा है...
लेकिन हनुमान कहां से लाएं...

©Alok Ranjan

Saturday, November 13, 2010

ज़िंदगी और जंग

रिश्तों को टूटता देख रहा हूं
बंधन को बिखरता देख रहा हूं
काश मैं वक्त को रोक देता
सबकुछ हाथों से सरकता देख रहा हूं

हंसी भी थी
खुशी भी थी
मंज़िल भी थी
रास्ते भी थे
पर सब निकलता देख रहा हूं

वो कहते हैं कि सब ठीक होगा
वो कहते हैं कि बिगड़ी भी बन जाएगी
वो कहते हैं कि वक्त सब ठीक कर देगा
पर वो नहीं जानते की मैं वक्त को
फिसलता देख रहा हूं

©Alok Ranjan