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Friday, December 12, 2008

ये खबर एक्सक्लूसिव है !


बहुत दिनों तक चुप बैठ रहा... सोच रहा था कि ना बोलना ही ज्यादा अच्छा है... पर क्या करूं रहा ही नहीं जाता... बिहारी हूं ना... चुप रहा ही नहीं जाता... किसी खबिरया चैनल ने ब्रेकिंग न्यूज़ चलायी... मुंबई धमाकों में जिन हैंडग्रेनेड्स का इस्तेमाल हुआ था वो उसी कंपनी का था... जिसका इस्तेमाल 93 के मुंबई ब्लास्ट में किया गया था.. यानि की इन धमाकों में भी दाउद इब्राहिम का हाथ हैं... मैं यहां पर ना तो दाउद का पक्ष ले रहा हूं और ना ही जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं... बात यहां पर न्यूज़ चैनल्स की खासकर हिंदी के चैनल्स की हो रही है... अपने आप को सबसे तेज़ और देश का सर्वश्रेष्ठ कहने वाला चैनल तो हर तीसरे दिन दाउद इब्राहिम से जुड़ी सनसनीखेज और एक्सक्लूसिव जानकारी देने की बात कह कर आधे घंटे का (कभी-कभी एक घंटे का भी) स्पेशल प्रोग्राम बना देता है... तस्वीरें ले देकर वहीं रहती हैं जो स्टॉक में पड़ीं हैं... उनकी एडिंटिंग भी कमोबेश एक सी ही रहती है... बस स्क्रिप्ट बदल जाती है... कहने का मेरा मतलब ये है कि आप दर्शकों को कुछ भी दिखा दो... ना तो वो पूछने जाता है... ना ही दाउद इब्राहिम या उसका कोई गुर्गा ये सफाई देने आता है कि जो कुछ भी दिखाया जा रहा है वो गलत है या सही है... और ना ही जांच एजेंसियां इसे गंभीरता से लेती हैं... अब इसे चैनल चलाने की कवायद कह लें या फिर आज की पत्रकारिता (शायद मैंने गलत शब्द का इस्तेमाल किया) मुंबई में आतंकी हमला हुआ... पत्रकारों की एक पूरी फौज ताज होटल, ओबेरॉय और नरीमन हाउस के बाहर कई दिनों तक डटे रहे... समाचार वाचक लगातार दर्शकों को बताते रहे कि हमारे रिपोर्टर जान पर खेलकर आपतक खबरें पहुंचा रहे हैं... ना किसी को खाने की फिक्र है और ना ही सोने की... चलिए बहुत अच्छी बात है... दर्शकों ने भी खूब सराहा.. वाह क्या जज्बा है... लेकिन हकीकत में जज्बा ये था कि कहीं वो टीआरपी की रेस में पिछड़ ना जाएं... किसी दूसरे चैनल से उनका चैनल पीछे ना रह जाए इसलिए हेड ऑफिस से हर मिनट फोन खड़काएं जा रहें थें... रिपोर्टर बेचारा अपनी जान बचाए... दूसरे रिपोर्टर क्या कर रहें हैं उस पर नज़र रखे... साथ ही एक्सक्लूसिव जानकारी भी पता करें... और उसके बाद एसी ऑफिस में बैठे बॉस की गालियां भी सुने... यानि कुल मिलाकर टीआरपी के लिए कुछ भी करने से परहेज़ नहीं है... खैर ज्यादा बोलूंगा तो पता नहीं कितनी बातें सामने आ जाएंगी... थोड़ा बहुत अगली बार के लिए छोड़ देता हूं...